पोटलां में जंगली सुअरों का आतंक: बारिश के इंतजार के बीच किसानों की फूटी चीत्कार, दर्जनों बीघा फसलें चौपट

​पोटलां।स्मार्ट हलचल|कस्बे सहित क्षेत्र किसानों पर एक तरफ आसमान से बरसने वाली बूंदों के इंतजार में किसान नंगे पांव खेतों में आंखें बिछाए बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ खेतों में खड़ी बची-कुची फसलों पर जंगली सुअरों का कहर टूट पड़ा है। पोटलां क्षेत्र में रात के अंधेरे में आने वाले सुअरों के झुंड ने दर्जनों बीघा फसलों को पूरी तरह रोंदकर तबाह कर दिया है। पसीने से सींची गई मेहनत को आंखों के सामने बर्बाद होता देख अब बेबस किसान सिर्फ भगवान के भरोसे दिन काटने को मजबूर हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि उन्होंने मक्का, मुंगफली, ज्वार, बाजरा, मूंग और अन्य खरीफ फसलें बड़ी उम्मीदों के साथ बोई थीं। बारिश की खींचतान ने पहले ही फसलों की रंगत छीन ली है, और अब रही-सही कसर जंगली सुअरों के झुंड पूरी कर रहे हैं। किसान रातों में खेतों पर मचान बनाकर, टॉर्च और लाठियां लेकर पहरा दे रहे हैं, लेकिन सुअरों के बड़े झुंड के आगे उनकी हर कोशिश नाकाम साबित हो रही है। गांव के कई किसानों के खेतों में सुअरों ने पूरी फसल को उखाड़कर फेंक दिया है। फसलें पकने की स्थिति में आने से पहले ही बर्बाद हो जाने से किसानों के सामने लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। खाद, बीज और जुताई में लगा हजारों रुपये का कर्जा अब किसानों के गले की फांस बन चुका है।
रिटायर्ड फौजी रतनलाल आचार्य, देवकिशन रेगर, लादू लाल नई, रतनलाल जाट जैसे पीड़ित किसानों का कहना है कि प्राकृतिक मार के साथ-साथ यह वन्यजीवों का आतंक उनकी कमर तोड़ रहा है। पिछले साल भी किसानों को सुअरों के आतंक का दंश झेलना पड़ा था वहीं कई बार आवाज उठाने के बावजूद प्रशासनिक या वन विभाग के स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। खेतों की सुरक्षा के लिए ना तो कोई स्थाई समाधान मिला है और ना ही नुकसान का कोई आंकलन करने आया है। शासन व प्रशासन तुरंत गिरदावरी करवाकर पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दे। जंगली सुअरों को आबादी और कृषि क्षेत्रों से दूर खदेड़ने के लिए वन विभाग की टीम तैनात की जाए। खेतों की तारबंदी (फेंसिंग) के लिए अनुदान योजना को धरातल पर तेजी से लागू किया जाए। ​अगर जल्द ही इस आतंक पर लगाम नहीं लगाई गई और बारिश की मेहरबानी नहीं हुई, तो पोटलां का किसान पूरी तरह बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएगा।