नामांकन छंटे तो बदली चुनावी तस्वीर: 960 पर्चे खारिज, 1,532 प्रत्याशी मैदान में

महेन्द्र नागौरी

भीलवाड़ा में अब टिकट से ज्यादा चुनौती बागियों को साधने की; 70 वार्डों में मुकाबला दिलचस्प

भीलवाड़ा|स्मार्ट हलचल|नगर निकाय चुनाव में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। नामांकन पत्रों की जांच और खारिज होने के बाद भीलवाड़ा जिले की 11 नगरीय निकायों में 1,532 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं। कुल 2,592 नामांकन पत्र दाखिल हुए थे, जिनमें से 960 पर्चे खारिज कर दिए गए। इसके बाद 1,632 नामांकन पत्र वैध पाए गए, जिनसे 1,532 प्रत्याशी वैध रूप से मैदान में हैं।
सबसे बड़ा राजनीतिक रण भीलवाड़ा नगर निगम के 70 वार्डों में दिखाई दे रहा है। यहां कुल 717 नामांकन पत्र दाखिल हुए, जिनमें से 315 खारिज हुए और 362 प्रत्याशी अंतिम रूप से मैदान में बचे हैं। यानी निगम चुनाव में हर वार्ड का समीकरण अब टिकट की घोषणा से निकलकर सीधे व्यक्तिगत पकड़, संगठन की ताकत और बागियों के प्रभाव पर आ गया है।
कहां कितने प्रत्याशी मैदान में?
निकाय
अंतिम प्रत्याशी:-
आसिंद
108
बनेड़ा
84
भीलवाड़ा नगर निगम
362
बिजोलिया
144
बिगोद
107
गंगापुर
98
गुलाबपुरा
160
हमीरगढ़
106
जहाजपुर
131
मांडलगढ़
94
शाहपुरा
138
कुल
1,532
राजनीतिक दलों के लिए असली परीक्षा अब शुरू:-
नामांकन खारिज होने के बाद चुनावी मैदान छोटा जरूर हुआ है, लेकिन राजनीतिक चुनौती और बड़ी हो गई है। टिकट की दौड़ में पीछे रह गए दावेदारों और निर्दलीय मैदान में उतरे नेताओं का रुख अब भाजपा-कांग्रेस दोनों के अधिकृत प्रत्याशियों का गणित बिगाड़ सकता है। राजस्थान के निकाय चुनावों में अंतिम समय पर बड़ी संख्या में बागियों के नामांकन करने की खबरें भी सामने आई हैं।
खासकर भीलवाड़ा नगर निगम में 70 वार्ड होने के कारण एक-एक बागी प्रत्याशी कई वार्डों में समीकरण बदलने की स्थिति में है। कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों को सिंबल नहीं मिलने का विवाद भी पहले ही चुनावी माहौल को गरमा चुका है।
अब नेताओं के सामने तीन बड़े सवाल:-
क्या पार्टी का टिकट ही जीत की गारंटी है?
क्या नाराज दावेदार पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में लौटेंगे या भीतरघात करेंगे?
क्या संगठन निर्दलीय मैदान में उतरे अपने ही नेताओं को आखिरी समय में मना पाएगा?
यही सवाल अब भाजपा और कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। नामांकन खारिज होने से कागजों पर उम्मीदवारों की संख्या घट गई है, लेकिन राजनीतिक मुकाबला और ज्यादा पेचीदा हो गया है।
भीलवाड़ा नगर निगम में 362 प्रत्याशियों का मैदान इस बात का संकेत है कि चुनाव सिर्फ पार्टी बनाम पार्टी नहीं रहने वाला—कई वार्डों में मुकाबला पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी बनाम अपने ही नाराज दावेदार के बीच भी दिखाई दे सकता है।
अब 9 और 11 सितंबर को जनता तय करेगी कि संगठन की ताकत भारी पड़ती है या स्थानीय चेहरे और बगावत का असर।