शिक्षा के क्षेत्र में दान करने वाले भामाशाहों का जिला कलक्टर ने किया सम्मान

80 साल की मांगी बाई ने स्कूल को मंदिर और बच्चों को भगवान माना

महेन्द्र धाकड़

चित्तौड़गढ़ । स्मार्ट हलचल|उम्र 80 वर्ष, जीवन में कोई बेटा-बेटी नहीं और खुद निरक्षर लेकिन गांव के बच्चों की जिंदगी शिक्षा से रोशन हो, इस भावना ने मांगीबाई अहीर को ऐसा संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया कि उनकी कहानी समाज के लिए अनुकरणीय बन गई। इसी के चले चितौड़गढ़ जिला कलेक्टर ने भामाशाहों को सम्मानित किया। राशमी तहसील के देवीपुरा गांव की निवासी मांगी बाई ने विद्यालय को ही मंदिर और बच्चों को भगवान मानते हुए 15 लाख रुपए विद्यालय विकास के लिए दान कर दिए।
विधवा मांगीबाई वर्तमान में अपने भतीजे देवीलाल अहीर के साथ रहती हैं। पहले धार्मिक कार्यों में दान करने वाली मांगी बाई ने अब शिक्षा को ही सबसे बड़ी सेवा मान लिया है। उन्होंने विद्यालय में पानी की टंकी, एक कक्षाकक्ष और सरस्वती मंदिर के निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के लिए सहयोग दिया। उनका मानना है कि गांव के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और आगे बढ़ें, इससे बड़ी खुशी उनके लिए कुछ नहीं है। मांगी बाई के शिक्षा के प्रति इस समर्पण को जिला कलक्टर डाॅ. मंजू ने समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए शिक्षा विभाग के भामाशाहों को प्रोत्साहित करने के लिए हर माह आठ भामाशाहों के सम्मान की पहल की है। इसी क्रम में आज समिति कक्ष में जिला कलक्टर ने दान करने वाले भामाशाहों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। जिला कलक्टर डाॅ. मंजू ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों को समृद्ध करना ही सच्ची सेवा है। विद्यालयों को उन्नत करने के लिए हर संभव सहयोग करने वाले भामाशाहों का योगदान अतुलनीय है। भामाशाहों की यह भावना अभिनंदनीय है कि समाज से बहुत कुछ मिला है, अब समाज को कुछ देने की भावना भी हो।

उन्होंने मांगी बाई के समर्पण को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण समाज को प्रेरणा देते हैं। जिला कलक्टर ने शिक्षा विभाग में भामाशाहों को प्रोत्साहित करने के लिए हर माह आठ भामाशाहों के सम्मान की पहल की है।

डॉ.मुस्तफा ने शुरू की डिजिटल क्रांति, मडावदा में हर घर ने जोड़ा स्कूल से नाता

भादसोड़ा के मूल निवासी और अमेरिका में रह रहे एनआरआई डाॅ. मुस्तफा ने गांव के बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए करीब 18 लाख रुपए का सहयोग किया। कम्प्यूटर लैब, शिक्षकों की व्यवस्था, इन्वर्टर, सीसीटीवी सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उन्होंने विद्या क्रांति फाउंडेशन बनाया है, जो क्षेत्र के विद्यालयों के विकास के लिए काम करेगा।
वहीं राउप्रावि मडावदा की स्कूल प्रबंधन समिति ने 150 घरों वाले गांव के प्रत्येक परिवार को विद्यालय से जोड़ा और करीब 5 लाख रुपए जुटाकर स्कूल का विकास कराया। आज यह विद्यालय निजी स्कूलों को टक्कर दे रहा है। ग्रामीणों की मांग पर कलक्टर ने खेल मैदान के लिए भूमि प्रबंधन, बालिका शौचालय और स्मार्ट बोर्ड के प्रस्ताव सीएसआर से स्वीकृत कराने के निर्देश दिए।