नेमीचंद मेघवानी की आँखें दो लोगों को देगी नई रोशनी महिला ने स्वयं पहल कर कराया ससुर का नेत्रदान

मृत्यु के बाद भी रोशनी का दान — भवानीमंडी से 164 वाँ नेत्रदान

रणवीर सिंह चौहान भवानी मंडी
स्मार्ट हलचल/ नेत्रदान रोशनी का दान है और मृत्यु के संवेदनशील क्षणों में भी यह परिवार को गहन आत्मीय संतोष प्रदान करता है। इसी भावना के कारण भवानीमंडी में नेत्रदान अब परिवारों की परम्परा बनता जा रहा है। गुरुवार को नगर के मेघवानी परिवार ने ऐसा ही अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया जब माता चंदा देवी मेघवानी के बाद पिता नेमीचंद मेघवानी का भी नेत्रदान कर समाज के सामने परोपकार की अनूठी मिसाल पेश की गई।

भारत विकास परिषद के नेत्रदान प्रभारी एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नगर संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि गुरुवार रात्रि को वस्त्र व्यवसायी नेमीचंद मेघवानी का निधन होने के पश्चात बहु श्वेता मेघवानी ने अपने पति दीपक मेघवानी से पिता के नेत्रदान की इच्छा व्यक्त की, तथा मौके पर उपस्थित राजेश गुप्ता कानूनगो की सूचना पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड ज्योति-रथ से भवानीमंडी के लिए रवाना हुए । उल्लेखनीय है कि जिस समय डॉ. गौड़ को सूचना मिली, वे स्वयं वायरल बुखार से पीड़ित थे, फिर भी मानव सेवा के संकल्प के साथ अपने मित्र मुकेश पांचाल को साथ लेकर वे रात्रि में भवानीमंडी पहुँचे और परिवारजनों की उपस्थिति में रात्रि 11 बजे नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण कर दो दृष्टिहीनों के लिए कॉर्निया प्राप्त किया। नेत्रदान प्रक्रिया में प्रकाश सीए, अरुण गर्ग तथा पौत्र तनिष्क व पुलकित मेघवानी का सहयोग रहा।

कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि 2 वर्ष पहले भी नेमीचंद मेघवानी की पत्नी चंदा देवी मेघवानी का नेत्रदान हो चुका है। नेत्रदान भवानीमंडी के परिवारों में एक परंपरा बनता जा रहा है, नगर के 17 परिवार ऐसे हैं जहां पर एक से अधिक सदस्य का नेत्रदान हुआ है। यही कारण है कि झालावाड़ जिले का भवानीमंडी कस्बा आज पूरे राजस्थान में परोपकार की अनूठी पहचान बना रहा है, जहाँ शोक की घड़ी में भी परिवार स्वयं आगे आकर नेत्रदान के लिए पहल कर रहे हैं।

नेत्रदानी नेमीचंद मेघवानी के पुत्र दीपक मेघवानी एवं पुत्रवधू श्वेता मेघवानी ने बताया कि उनके पिता धार्मिक एवं परोपकारी स्वभाव के थे, तथा माता चंदा देवी के नेत्रदान में भी उनकी अहम भूमिका रही थी, ऐसे में अंतिम समय में भी उनकी आंखों से किसी का भला हो जाए यही सोचकर उन्होंने नेत्रदान का निर्णय लिया है।