भादवी बीज के पावन पर्व पर गुरला में निकली भव्य शोभा यात्रा, बाबा रामदेव की भक्ति में सराबोर हुआ पूरा गांव, महिलाओं ने गाए मंगल गीत

गुरला :- स्मार्ट हलचल|मारवाड़ के लोकदेवता बाबा रामदेव जी महाराज के परम पावन पर्व भादवी बीज के अवसर पर आज ग्राम पंचायत गुरला में एक विशाल एवं भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। इस शोभा यात्रा को लेकर गांव में पिछले कई दिनों से उत्साह का माहौल बना हुआ था। आज जैसे ही सुबह हुई, पूरे गांव में बाबा रामदेव के जयकारे गूंजने लगे।भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भादवी बीज के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन बाबा रामदेव जी ने समाधि ली थी और इसी दिन से उनका मेला रामदेवरा में शुरू होता है। लोकदेवता बाबा रामदेव को हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है और इन्हें पीरों के पीर रामसा पीर के नाम से भी जाना जाता है। इन्होंने समाज में छुआछूत, ऊंच-नीच और जात-पात के भेदभाव को मिटाकर मानवता का संदेश दिया। उन्हीं की शिक्षाओं को याद करते हुए हर साल भादवी बीज पर गुरला गांव में यह आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ किया जाता है।रेगर मोहल्ला स्थित रामदेव मंदिर से हुई शोभा यात्रा की शुरुआतआज की यह भव्य शोभा यात्रा गुरला के रेगर मोहल्ला स्थित प्राचीन श्री बाबा रामदेव मंदिर परिसर से प्रारंभ हुई। मंदिर को सुबह से ही फूलों और विद्युत झालरों से विशेष रूप से सजाया गया मंदिर पुजारी द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद बाबा रामदेव की प्रतिमा को फूलों से सजे रथ में विराजमान किया गया। रथ के आगे-आगे ढोल-नगाड़े बज रहे थे और युवा टोलियां बाबा के निशान लिए चल रही थीं।जैसे ही शोभा यात्रा मंदिर परिसर से बाहर निकली, “बाबो भली करे”, “जय बाबा री”, “रामसा पीर की जय” के जयकारों से पूरा आकाश गूंज उठा। शोभा यात्रा में सबसे आगे घोड़े पर सवार निशानधारी चल रहे थे, उसके पीछे ढोल-मंडल और भजन मंडली भजन-कीर्तन करते हुए चल रही थी। बीच में बाबा रामदेव का भव्य दरबार सजा हुआ रथ था, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े।
भजन-कीर्तन और महिलाओं के गीतों से भक्तिमय बना माहौलइस शोभा यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि इसमें गांव की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सिर पर चुनरी ओढ़े, बाबा रामदेव के भजनों पर नाचते-गाते चल रही थीं। वे “रामदेव जी ब्यावने आयो”, “हेलो मारो सुणो रामदेव जी” जैसे पारंपरिक लोकगीत गा रही थीं। उनकी भक्ति और उत्साह देखते ही बन रहा था।
पुरुष श्रद्धालु भी “थारो नाम बाबा तारणहार” और “अजमल जी रा कंवर” जैसे भजनों पर झूमते हुए चल रहे थे। छोटे-छोटे बच्चे भी अपने हाथों में छोटे-छोटे झंडे लिए “जय बाबा री” बोलते हुए यात्रा में शामिल थे। पूरी यात्रा के दौरान भजन-कीर्तन का दौर लगातार चलता रहा, जिससे पूरे गांव का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।गांव के प्रमुख मार्गों से होकर निकली शोभा यात्रारेगर मोहल्ला स्थित रामदेव मंदिर से शुरू हुई यह शोभा यात्रा गांव के विभिन्न प्रमुख मार्गों और मंदिरों से होते हुए निकली। यात्रा सबसे पहले शिव मंदिर पहुंची, जहां भगवान शिव के दर्शन के बाद यात्रा मेन बाजार में प्रवेश कर गई। मेन बाजार में व्यापारियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर शोभा यात्रा का स्वागत किया और बाबा के रथ की आरती उतारी।

मेन बाजार से होते हुए शोभा यात्रा प्राचीन चारभुजा नाथ मंदिर पहुंची। वहां भगवान चारभुजा नाथ के दर्शन करने के बाद यात्रा गांव के बड़ा मंदिर पहुंची। बड़ा मंदिर पर भी पुजारियों ने शोभा यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा बस स्टैंड से होते हुए विभिन्न गलियों से होते हुए पुनः अपने प्रारंभिक स्थल रेगर मोहल्ला स्थित रामदेव मंदिर पहुंचकर सम्पन्न हुई।

पूरे रास्ते में ग्रामीणों ने अपने घरों के बाहर रंगोली सजाई और यात्रा पर फूल बरसाए। जगह-जगह शीतल जल और शरबत की व्यवस्था भी ग्रामीणों द्वारा की गई थी। आज की इस शोभा यात्रा में भी गांव के सभी समाजों के लोगों ने एक साथ मिलकर भाग लिया। रेगर समाज के साथ-साथ जाट, गुर्जर, ब्राह्मण, माली, तेली सहित सभी समाज के लोग एक साथ बाबा के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। यह दृश्य वास्तव में बाबा रामदेव जी के “मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है” के संदेश को चरितार्थ कर रहा था।
यात्रा के अंत में मंदिर प्रांगण में महाआरती का आयोजन किया गया और उसके बाद सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण किया गया। आयोजकों ने बताया कि हर साल भादवी बीज पर गुरला में इसी प्रकार भव्य शोभा यात्रा निकाली जाती है और आने वाले वर्षों में इसे और भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा।