तपोग्नि से निखरेगी आत्मा, तभी खुलेगा मोक्ष का द्वार

तपोग्नि से निखरेगी आत्मा, तभी खुलेगा मोक्ष का द्वार

 

आचार्य पुलकसागर बोले- शरीर से ज्यादा मन की ताकत जरूरी, जो तपता है वही निखरता है

महेंद्र नागौरी

भीलवाड़ा। स्मार्ट हलचल।सोना आग में तपकर निखरता है और आत्मा तपस्या से परमात्मा बनती है। जीवन को निखारना है तो तपना ही पड़ेगा। शरीर और आत्मा दोनों को तपाने पर ही मुक्ति का मार्ग खुलेगा। यह संदेश राष्ट्र संत आचार्य मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने मंगलवार को सूर्यमहल, शास्त्रीनगर में दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना के दौरान दिया।

आचार्यश्री ने कहा कि तपस्या के लिए शरीर से ज्यादा मन की ताकत चाहिए। मन मजबूत हो तो कठिन तप भी सहज हो जाता है और मन कमजोर हो तो तप के मार्ग पर चलना मुश्किल है। महावीर दर्शन न भोग का है, न केवल योग का, बल्कि उपयोग का दर्शन है।

उन्होंने कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि भीतर की अशुद्धियों को जलाना भी है। बाहर और भीतर दोनों स्तर पर तप करने वाला ही मोक्ष का अधिकारी बनता है। तपस्वियों की अनुमोदना करने से भी पुण्य मिलता है। दस दिन की उपवास तपस्या करने वाले तपस्वियों का सम्मान और अनुमोदना समाज का दायित्व है।

भक्ति में झूमे श्रावक-श्राविकाएं

उत्तम तप धर्म के अवसर पर भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और पूजन हुआ। भक्ति के दौरान श्रावक-श्राविकाएं झूमते-नाचते नजर आए। पाप नाशनम् शिविर में सैकड़ों श्रद्धालु सुबह से रात तक पूजा, साधना और भक्ति में जुटे हैं।

चातुर्मास समिति अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि भगवान का अभिषेक करने का सौभाग्य संतकुमार, विपुल व अतुल पाटनी परिवार को तथा शांतिधारा का सौभाग्य पारस व खुश्बू जैन, इंदौर को मिला। शाम की महाआरती श्री पार्श्वनाथ महिला मंडल, शास्त्रीनगर ने की।

बुधवार को उत्तम त्याग धर्म की आराधना होगी। दस दिवसीय पर्युषण आराधना 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर पूर्ण होगी। आयोजन में चातुर्मास समिति अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे हुए हैं।