अणुव्रत संदेश से गूंजा द्रोण स्कूल, सांप्रदायिक सौहार्द्र का दिया संदेश

पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उकेरे सद्भाव, अहिंसा और संयम के रंग

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल।अणुव्रत केवल किसी एक वर्ग या समुदाय का संदेश नहीं, बल्कि बेहतर समाज और मानवीय मूल्यों की राह दिखाने वाला जीवन दर्शन है। इसी भावना को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से द्रोण पब्लिक स्कूल, शाहपुरा में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के तहत सांप्रदायिक सौहार्द्र दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को आपसी प्रेम, भाईचारे, अहिंसा, सत्य और संयम के महत्व से रूबरू कराया गया।
कार्यक्रम में अणुव्रत समिति के अध्यक्ष रामस्वरूप काबरा, गीतकार सत्येंद्र मंडेला एवं संयोजक गोपाल पांचोली मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विद्यालय संचालक गौरव गोखरू एवं विजय राजोरा ने अतिथियों का तिलक लगाकर एवं उपरणा पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।
पोस्टरों में दिखी सद्भाव की तस्वीर
सांप्रदायिक सौहार्द्र दिवस के अवसर पर विद्यालय में पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से सामाजिक एकता, भाईचारे, अहिंसा और सद्भाव का संदेश आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। रंगों और कल्पनाओं से सजे पोस्टरों में विद्यार्थियों ने समाज में मिल-जुलकर रहने तथा भेदभाव से दूर रहने की प्रेरणा दी।
प्रतियोगिता में हितांश राजोरा ने प्रथम, जागृति बुला ने द्वितीय तथा हर्षित जिंगर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

बच्चों को दिलाया सद्भाव का संकल्प
कार्यक्रम में अतिथियों ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को जोड़ने वाली सोच को मजबूत करना आवश्यक है। अणुव्रत के सिद्धांत व्यक्ति को स्वयं के आचरण में बदलाव लाने के साथ-साथ समाज में शांति और सौहार्द्र स्थापित करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अहिंसा, सत्य, संयम और सह-अस्तित्व को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
विद्यालय प्राचार्य विजय राजोरा एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों को अणुव्रत के पदचिह्नों पर चलने तथा जाति, धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठकर मानवता को प्राथमिकता देने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों के बीच यह संदेश छोड़ा कि सद्भाव और भाईचारे की शुरुआत स्वयं से होती है और यही मजबूत समाज की नींव बनती है।