भीलवाड़ा का ऐतिहासिक चातुर्मास सम्पन्न, शरद पूर्णिमा तक रहेगा महाराज का प्रवास
भीलवाड़ा, 21 अक्टूबर।स्मार्ट हलचल|“चातुर्मास का सम्पन्न होना परंपरा है, लेकिन भीलवाड़ा में पांचवीं बार हुए इस ऐतिहासिक चातुर्मास की स्मृतियां सदैव दिलों में जीवंत रहेंगी। हमारी विदाई को जुदाई न समझना, सदा याद तुमको हमारी रहेगी।” इन भावपूर्ण शब्दों के साथ अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी रामदयालजी महाराज ने बुधवार को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के अंतिम सत्संग में श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। चातुर्मास की पूर्णाहुति पर वातावरण श्रद्धा, भक्ति और भावुकता से सराबोर रहा। आचार्यश्री ने घोषणा की कि चातुर्मास सम्पन्न होने के बाद भी शरद पूर्णिमा तक उनका भीलवाड़ा प्रवास रहेगा।
एकादशी के अवसर पर रामस्नेही परंपरा के अनुसार दोपहर में वाणीजी पाठ, भजन और कीर्तन के साथ चातुर्मास का समापन हुआ। आचार्यश्री ने कहा कि भव्य पधरावणी के साथ शुरू हुए इस चातुर्मास में उन्हें श्रद्धालुओं का जो प्रेम और स्नेह मिला, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। भीलवाड़ा उनके लिए विशेष केंद्र है और यहां बिताए तीन माह दीपावली से कम नहीं रहे। उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा महोत्सव भीलवाड़ा के कुवाड़ा धाम में रात्रि में भजन-कीर्तन और खीर का भोग लगाकर मनाया जाएगा।
आचार्यश्री ने स्वास्थ्य जांच के लिए इंदौर जाने की भावना भी व्यक्त की। दीपावली मनाने के लिए विभिन्न स्थानों से मिले आमंत्रणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इंदौर छावनी रामद्वारा अथवा भीलवाड़ा रामद्वारा में से किसी एक स्थान पर दीपावली मनाने का निर्णय चिकित्सकीय परामर्श और स्वामी रामचरणजी महाराज के आदेश के अनुसार किया जाएगा।
चातुर्मास के अंतिम सत्संग में विदाई के क्षण भावुक हो उठे। चातुर्मास आयोजक अजमेरा, गगराणी और ईनाणी परिवार के सदस्यों ने ‘सूना है आंगन, सूना है मन’ गीत के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किए। वहीं संत प्रीतमरामजी कोटा ने भजन के जरिए चातुर्मास के अनुभवों को प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं के चेहरों पर जहां चातुर्मास सम्पन्न होने की संतुष्टि थी, वहीं आचार्यश्री के प्रवास की अवधि पूरी होने की भावुकता भी साफ दिखाई दी।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने चातुर्मास में सानिध्य और सहयोग प्रदान करने वाले संतों के प्रति आभार व्यक्त किया। इनमें बड़े साध उदयपुर के संत नरपतरामजी, प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट, संत गौतमरामजी गंगापुर, संत प्रीतमरामजी कोटा, संत रामजसजी ईडर, भीलवाड़ा भंडारी संत खुशीरामजी और संत जयरामदासजी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि इन संतों के साथ चातुर्मास कैसे व्यतीत हो गया, इसका पता ही नहीं चला।
आयोजक अजमेरा, गगराणी और ईनाणी परिवार की सराहना करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि इन परिवारों ने तन, मन और धन से सहयोग कर चातुर्मास को भव्यता और नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। उन्होंने बताया कि इस दौरान ज्ञान, योग और सत्संग के साथ भक्त और भगवान के संबंधों पर चर्चा हुई। साथ ही एक अच्छे समाज और राष्ट्र के निर्माण के विषय पर भी विचार रखे गए।
प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य को संसार की अनेक बातें भूल जाएं, लेकिन परमात्मा राम को कभी नहीं भूलना चाहिए। जिन्होंने राम को याद रखा, वे आबाद हो गए और जिन्होंने उन्हें भुला दिया, वे बर्बाद हो गए। राम अच्छाई और रावण बुराई का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि कभी किसी का बुरा करने या उसे कष्ट पहुंचाने की भावना नहीं रखनी चाहिए। दूसरों को धोखा देने वाले को अंततः धोखे का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति को अपनी आत्मा के साथ भी छल-कपट नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो विचार और कार्य व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र तथा विश्व के हित में हों, उन्हें अपनाना चाहिए। अपनी पसंद दूसरों पर थोपने के बजाय सबके हित का ध्यान रखना जरूरी है। समाज के परिप्रेक्ष्य में जीवन जीने के लिए उसके श्रेष्ठ सिद्धांतों को आत्मसात करना होगा।
प्रवचन के बाद राम साधना मंडल ग्रुप की ओर से चातुर्मास आयोजक भंवरलाल-अशोककुमार अजमेरा परिवार, लालचंद-शिवकुमार-अशोककुमार-मुकेशकुमार गगराणी परिवार तथा मुरली-श्याम ईनाणी परिवार का स्वागत-सम्मान किया गया। चातुर्मास समिति की ओर से आचार्यश्री ने आयोजन के दौरान सराहनीय सेवाएं देने वाले श्रद्धालुओं को सम्मानित कर आशीर्वाद प्रदान किया।
सम्मानित होने वालों में रामनिवास धाम ट्रस्ट के ट्रस्टी जगदीश सोमानी, भोजन वितरण समिति के कमलेश अजमेरा, ग्रुप के सुरेश गट्याणी, शिवनारायण गट्याणी, भगवान गुप्ता, महावीर अजमेरा, गणेश समदानी, सत्यनारायण सोमानी, अशोक मूंदड़ा, सुधीर लढ़ा, मुकेश अजमेरा, मुकुट बसेर, मधुसूदन नौलखा, मंगल जैन, राधेश्याम झंवर, केसरसिंह जैन, शंभू मालू, विजयवर्गीय समाज अध्यक्ष विजय मेड़तिया, मनीष विजयवर्गीय, विजयवर्गीय महिला मंडल की पुष्पा विजयवर्गीय, राम साधना मंडल की पुष्पा झंवर, प्रहलाद जागेटिया सहित अन्य श्रद्धालु शामिल रहे। चातुर्मास में सेवाएं देने वाले सेवादारों का भी सम्मान किया गया। अंत में श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।