गुरला:-स्मार्ट हलचल|नेशनल हाईवे 758 स्थित नरसिंहपुरा गांव में स्थित मुजरास टोल प्लाजा (राष्ट्रीय राजमार्ग 758 के पास एक गंभीर और मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। टोल प्रबंधन द्वारा अपने निजी लाभ के लिए ग्राम पंचायत के सार्वजनिक और आम रास्ते को बार-बार जेसीबी मशीन से गहरी खाई खोदकर बंद किया जा रहा है। इस अवैध और अमानवीय कृत्य के कारण अब तक दर्जनों बेजुबान गायों और अन्य जानवरों की दर्दनाक खाईं में गिरने से मौत हो चुकी है। ग्रामीणों द्वारा बार-बार विरोध करने और ग्राम पंचायत द्वारा समझाइश देने के बावजूद टोल कर्मी दादागिरी पर उतारू हैं और ग्रामीणों को धमकाते हैं कि “तुमसे जो होता है कर लो, रास्ता तो बंद ही रहेगा।”
मुजरास टोल प्लाजा के बगल से एक कच्चा लेकिन आम रास्ता निकलता है, जो मुजरास, गुरला,काबरो का खेड़ा और आसपास के 8-10 गांवों को ओर खेतों और मुख्य गांव से जोड़ता है। यह रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत के आम रास्ते के रूप में दर्ज है। किसान इसी रास्ते से अपनी फसल, ट्रैक्टर-ट्रॉली और मवेशी लेकर आते-जाते हैं। महिलाएं और बच्चे भी इसी रास्ते का उपयोग करते हैं।
पिछले दस सालों से टोल प्रबंधन को यह डर है कि लोग टोल बचाने के लिए इस आम रास्ते का उपयोग न करने लगें, इसलिए उन्होंने बिना किसी सरकारी अनुमति के, ग्राम पंचायत को बिना सूचित किए, इस रास्ते पर लगभग 8 से 10 फीट गहरी और चौड़ी लंबी खाई खोद दी है। जब ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर उसे भरा, तो दो दिन बाद फिर से जेसीबी लाकर उससे भी गहरी खाई खोद दी गई। ऐसा अब तक कई बार हो चुका है।
*गौवंश की लगातार खाईं में गिरना दिल दहलाने वाली तस्वीरें
ग्रामीणों के अनुसार इस खाई के कारण सबसे बड़ा नुकसान गौवंश को हुआ है। रात के अंधेरे में चरकर लौट रही गायें और आवारा घूम रहे बछड़े इस गहरी खाई में गिर जाते हैं। खाई में पानी और कीचड़ भरा होने से वे निकल नहीं पाते और तड़प-तड़प कर मर जाते हैं। ग्रामीण रमेश कुमावत ने बताया, “पिछले महीने ही गायें इसी खाई में गिरकर मर गईं। मैंने टोल वालों से हाथ जोड़कर कहा कि गड्ढा भर दो, तो उन्होंने मुझे गाली देकर भगा दिया।कुछ जानवरों के शव तो कई दिन तक खाई में ही पड़े रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई और बीमारी का खतरा बन गया।इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि टोल प्रबंधन गांव वाले को कुछ नहीं समझता। गुरला नरसिंहपुरा ग्राम पंचायत के ग्रामीण ने बताया कि उन्होंने कही बार टोल मैनेजर को लिखित में दिया कि यह पंचायती रास्ता है, इसे मत खोदो, लेकिन हर बार उन्हें अनसुना कर दिया गया। जब ग्रामीण मौके पर जाते तो टोल कर्मचारी उन्हें घेर लिया करते और धमकाते। “टोल वाले कहते हैं कि हमने NHAI से ठेका लिया है, हम कुछ भी कर सकते हैं। पंचायत क्या कर लेगी? यह सीधे-सीधे सत्ता और पैसे की दादागिरी है।”
नियमानुसार, किसी भी आम रास्ते, सार्वजनिक रास्ते या ग्राम पंचायत की भूमि पर कोई भी निर्माण या खुदाई करने के लिए जिला परिषद और ग्राम पंचायत से NOC लेना अनिवार्य है। NHAI की गाइडलाइन भी स्पष्ट कहती है कि टोल प्लाजा सर्विस रोड के अलावा किसी भी ग्रामीण रास्ते को अवरुद्ध नही तत्काल प्रभाव से मुजरास टोल के पास खोदी गई सभी अवैध खाइयों को भरकर आम रास्ते को सुचारू किया जाए।
भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए SDM कोर्ट से टोल प्रबंधन को पाबंद किया जाए। मृत गायों के मालिक किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
यह मामला सिर्फ एक रास्ते का नहीं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र, गौ-संरक्षण और आम आदमी के हक का है। एक निजी टोल कंपनी किस तरह सरकारी सिस्टम को ठेंगा दिखाकर पंचायती रास्ता खोद सकती है और बेजुबान जानवरों की जान ले सकती है, यह प्रशासन के लिए भी एक बड़ा सवाल है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर कितनी जल्दी संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है।