(उमड़ी श्रोताओं की भीड़)
गंगापुर दिनेश लक्षकार
स्मार्ट हलचल|गंगापुर मेले के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों और कवयित्रियों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में हास्य, प्रेम, गीत, पैरोडी और वीर रस की रचनाओं ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मथुरा से आई कवयित्री पूनम वर्मा ने सरस्वती वंदना से किया। ठेकला गंगापुर के गीतकार मूमल राजगोपाल ने अपने चर्चित राजस्थानी गीत ‘कोरे काळजै लपट उठे’ तथा इंस्टाग्राम पर लोकप्रिय अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से माहौल को गीतमय बना दिया। प्रतापगढ़ के कवि पार्थ नवीन ने ‘जग घूमिया राजस्थान सा ना कोई’ एवं हर एक नेता कुर्सी को ऐसे देखता है
बबीता को जैसे जेठालाल देख रहा हो।
सहित अनेक पैरोडियों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कवि दीपक पारीक ने अपनी जबरदस्त हास्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। हास्य के साथ उन्होंने संदेशपरक रचनाएं भी सुनाईं। उनकी पंक्तियां—
काफिये सारे मिलाना जानता हूँ, गीत ग़ज़लें सब सुनाना जानता हूँ
अब किसी सैलाब से खतरा नहीं है, मैं दिलों में घर बनाना जानता हूँ ने श्रोताओं की खूब दाद बटोरी।पोटलां गंगापुर के कवि एवं कार्यक्रम के सूत्रधार बद्री बसंत ने अपनी कविता—
मां तन, मन से रीझती है,बोई बेल उसे खून से सींचती है।
के माध्यम से मातृत्व और समर्पण के भावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
मथुरा से आई कवयित्री पूनम वर्मा ने ‘मैं ब्रज की बांसुरी हूं, प्रेम का संदेश लाई हूं’ जैसे मुक्तकों के साथ प्रेमगीत सुनाकर श्रोताओं को प्रेम और भक्ति के भावों से सराबोर किया ।
शक्करगढ़ से आये कवि राजकुमार बादल ने राजस्थानी गीतों की झड़ी लगाते हुए म्हारी चाय ने भी मीठी कर दे और राजनैतिक सूचिता पर गीत पढ़कर जबरदस्त माहौल बनाया ।
कार्यक्रम का संचालन मुंबई से आए कवि सुनील व्यास ने किया। उन्होंने अपनी भावुक कविता—
रूबरू तो देखा नहीं ईश्वर को कभी पर,
मेरा दावा है मेरे पिता से ज्यादा खूबसूरत नहीं हो सकता।
सुनाकर पूरे वातावरण को भावनात्मक बना दिया। पिता के प्रति प्रेम और सम्मान से ओतप्रोत इन पंक्तियों पर श्रोताओं ने भावपूर्ण प्रतिक्रिया दी।
वहीं अलवर से आए प्रसिद्ध वीर रस के कवि विनीत चौहान ने अपनी ओजस्वी प्रस्तुति से श्रोताओं में वीर रस का संचार किया। उनकी पंक्तियां—
सोलह हजार रानी कूदी जौहर कुंड को मान दिया,
राजपूती आन बचाने को पावन अग्नि स्नान किया।
ने इतिहास, त्याग और राजपूती आन-बान के भावों को जीवंत कर दिया।
कवि सम्मेलन में नगरपालिका गंगापुर के चेयरमैन प्रीति लखन काकाणी, उपाध्यक्ष रश्मि चौहान, अधिशासी अधिकारी ,धीरज चंदेल, पार्षद राजकुमार तेली, रामप्रसाद माली, मुकेश चंदेल,भोलाराम माली,बंशी लाल रैगर ,मनीष सांखला प्रशांत कसेरा सहित सभी पार्षदगण गंगापुर व आसपास के हजारों श्रोता उपस्थित थे।