16 साल की उम्र में खुद ने, प्रशासन से गुहार लगाकर रूकवाई अपनी शादी

बूंदी: स्मार्ट हलचल|अक्षय तृतीया पर जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ बेटियों की बढ़ती जागरूकता और प्रशासन की सक्रियता के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं. हाल ही में सामने आए दो अलग-अलग मामलों में एक 16 वर्षीय बालिका ने स्वयं आगे आकर अपना बाल विवाह रुकवाया, जबकि प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए दो अन्य नाबालिग बालिकाओं का विवाह समय रहते रुकवाकर उन्हें संरक्षण प्रदान किया

चाइल्डलाइन जिला समन्वयक रामनारायण गुर्जर ने बताया कि सदर थाना क्षेत्र की एक 16 वर्षीय बालिका, जो कक्षा 12वीं में अध्ययनरत है, ने अपने साहस और दृढ़ निश्चय से समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है. बालिका का विवाह आगामी 1 मई को सम्मेलन में तय किया गया था, लेकिन उसने स्पष्ट रूप से विवाह से इंकार करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखने की इच्छा जताई. सूचना मिलते ही चाइल्डलाइन टीम और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचे. टीम ने बालिका से संवाद कर उसकी इच्छा को प्राथमिकता दी और बाल कल्याण समिति के निर्देशानुसार उसे शेल्टर होम में सुरक्षित प्रवेश दिलाया गया. यहां उसकी शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है

अब तक चौथा मामला: बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में यह चौथा मामला है, जब किसी बालिका ने खुद आगे आकर अपना बाल विवाह रुकवाया है. यह दर्शाता है कि बूंदी जिले में बेटियों के बीच शिक्षा के प्रति लगाव और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. रायथल तहसीलदार नरोत्तम मीणा ने बताया कि थाना रायथल क्षेत्र में भी प्रशासन ने सतर्कता और तत्परता का परिचय दिया. 20 अप्रैल को दो नाबालिग बालिकाओं और एक नाबालिग बालिका का विवाह प्रस्तावित होने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर प्रभावी कार्रवाई की, 40 साल के व्यक्ति से तय की नाबालिग की शादी, बालिका ने घर से भागकर प्रशासन से लगाई गुहार, बेचने का भी लगाया आरोप

शेल्टर होम में रखा सुरक्षित

तहसीलदार नरोत्तम मीणा, थानाधिकारी हरलाल मीणा और रामनारायण गुर्जर, बुद्धि प्रकाश, मनजीत कौर, रवि कुमार एवं अर्चना मीणा ने संयुक्त रूप से साक्ष्य संकलित कर विवाह को रुकवाया. जांच में दोनों बालिकाओं की आयु 17 वर्ष और 15 वर्ष पाई गई, जबकि बालक की आयु 18 वर्ष थी. रामनारायण गुर्जर ने बताया कि दोनों बालिकाएं अभी अध्ययनरत हैं. एक कक्षा 10वीं में और दूसरी कक्षा 12वीं में पढ़ रही है. बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार उन्हें शेल्टर होम में सुरक्षित रखा गया है, जहां मजिस्ट्रेट की निषेधाज्ञा जारी होने तक उनकी देखभाल की जाएगी।