ऊकरूंद में आस्था का महासंगम: हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ

धर्म, संस्कृति और भाईचारे का अनूठा संगम बना आयोजन, गांव के कोने-कोने में गूंजे जयकारे

नीरज मीणा

महवा। स्मार्ट हलचल|ग्राम ऊकरूंद में गुरुवार को धार्मिक आस्था, सनातन संस्कृति और सामाजिक एकता का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ किया गया। पूरे गांव में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल रहा। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सिर पर कलश धारण कर जब यात्रा में शामिल हुईं तो गांव की गलियां भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग गईं। भगवान के जयकारों, भजन-कीर्तन और शंखध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
आयोजक काडूराम मीना ने बताया कि कथा महोत्सव के शुभारंभ से पूर्व उनके निज निवास पर वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना, हवन एवं कलश पूजन का आयोजन किया गया। विद्वान आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए, जिसके बाद संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति में कलश यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया गया।
कलश यात्रा में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों एवं बच्चों सहित हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सिर पर कलश धारण किए महिलाओं की लंबी कतारें आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं द्वारा गाए जा रहे मंगल गीतों ने पूरे आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया। यात्रा में शामिल श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण एवं सनातन धर्म के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे, जिससे पूरा गांव धर्ममय वातावरण में डूब गया।
भव्य कलश यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों, चौक-चौराहों एवं धार्मिक स्थलों से होकर निकली। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं का फूल-मालाओं, पुष्प वर्षा, फल एवं शीतल जलपान से भव्य स्वागत किया गया। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे, जहां श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। ग्रामीणों के उत्साह और सहयोग ने आयोजन को यादगार बना दिया।
यात्रा के दौरान सामाजिक समरसता और भाईचारे की अनूठी मिसाल भी देखने को मिली। गांव के सभी वर्गों एवं समाजों के लोग एक साथ धार्मिक आयोजन में सहभागी बने। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कारों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। धर्म के माध्यम से प्रेम, सद्भाव और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा मिलता है।
आयोजक काडूराम मीना ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा देने वाली दिव्य ज्ञान गंगा है। कथा के श्रवण से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक जागृति आती है तथा उसे धर्म, सत्य, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से कथा में नियमित रूप से उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया।
कलश यात्रा के कथा स्थल पहुंचने पर विधिवत पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कथा महोत्सव का शुभारंभ किया गया। आगामी दिनों में कथा व्यास द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का रसपान कराया जाएगा। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्तों के प्रति उनकी करुणा, धर्म स्थापना, भक्ति की महिमा तथा मानव जीवन के कल्याणकारी संदेशों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है। आधुनिकता के इस दौर में ऐसे आयोजन समाज में नैतिकता, संस्कार और भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, युवाओं एवं महिलाओं सहित हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, बैठने एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। कथा महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
भक्ति, श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का यह अद्भुत संगम ऊकरूंद गांव के लिए एक ऐतिहासिक एवं यादगार अवसर बन गया।
इस अवसर पर आयोजक रामफूल मीना, जगमोहन जयन, खुशीराम मीना,काडूराम मीना, मेघराम डीलर, जगदीश मीना, रघुवीर मीना, कल्लू मीना,जीतेश मीना, उमाशंकर मीना सहित अनेक महिलाएं एवं पुरुष मौजूद रहे थे।