अंबेडकर जयंती पर उमड़ा जनसैलाब: नरेश मीणा ने दूनी-देवली में भरी हुंकार,“संघर्ष और विचारों को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि”

– हजारों लोगों की मौजूदगी में जुलूस व सभाएं-सामाजिक न्याय और अधिकारों को लेकर किया एकजुट होने का आह्वान

शिवराज बारवाल मीना
टोंक । स्मार्ट हलचल|जिले के दूनी एवं देवली में मंगलवार, 14 अप्रैल को भारतरत्न संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर आयोजित विशाल जुलूस, रैली एवं सभाओं में भगत सिंह सेना के प्रमुख किसान नेता नरेश मीणा ने शिरकत की। इस दौरान हजारों की संख्या में मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने बाबा साहब के संघर्षपूर्ण जीवन, उनके विचारों और संविधान की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
नरेश मीणा ने कहा कि बाबा साहब का जीवन संघर्ष, त्याग और आत्मबल की अद्भुत मिसाल है। विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने समाज में व्याप्त छुआछूत, भेदभाव और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और देश को ऐसा संविधान दिया, जिसने सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार प्रदान किया।उन्होंने कहा कि महापुरुषों की जयंती मनाना तभी सार्थक है, जब हम उनके बताए मार्ग पर चलें। समाज के शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने का कार्य ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अपने राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र से बिना किसी दल के चुनाव लड़कर उन्होंने जनता का भरोसा जीता और छात्र राजनीति में भी हमेशा वंचित वर्गों को नेतृत्व में आगे बढ़ाने का कार्य किया। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय में अपने योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से मेघवाल समाज से आने वाले विनोद जाखड़ को विश्वविद्यालय अध्यक्ष बनने का अवसर मिला, जो आगे चलकर एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। वहीं बैरवा समाज की बेटी पूजा वर्मा को भी नेतृत्व में आगे बढ़ाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।नरेश मीणा ने कहा कि अन्याय के खिलाफ वे हमेशा मजबूती से खड़े रहे हैं। पीपलोदी घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सात गरीब बच्चों की मौत के मामले में न्याय के लिए उन्हें 40 दिन जेल में रहना पड़ा और 15 दिन तक भूख हड़ताल करनी पड़ी। उन्होंने बाबा साहब के विचारों से प्रेरित नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कांशीराम ने दलित समाज में राजनीतिक चेतना जगाई, जिसके परिणामस्वरूप मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। वहीं वर्तमान में चंद्रशेखर आजाद भी सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के योगदान को भी याद किया।वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि वंचित वर्गों के अधिकारों को कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं और निजीकरण के जरिए आरक्षण व्यवस्था को प्रभावित किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर भी आरोप लगाए कि वह दलित एवं आदिवासी वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने में विफल रही है। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी द्वारा मीणा समाज के नेताओं को राजनीति में आगे बढ़ाने का उल्लेख करते हुए समाज के सभी वर्गों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया। इस अवसर पर नरेश मीणा ने दूनी में बाबा साहब की प्रतिमा स्थापना के लिए 51,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति द्वारा उनका स्वागत एवं सम्मान किया गया।