दिलखुश मोटीस
सावर(अजमेर)@स्मार्ट हलचल|सावर ब्लॉक एएनएम/एलएचवी संघ ऑफ राजस्थान एवं राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के तत्वावधान में बुधवार को सावर ब्लॉक की एएनएम ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (बीसीएमओ) राजेश गुप्ता को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस, मीडिया एवं विभागीय आदेशों के माध्यम से प्रसूता मृत्यु एवं गर्भवती महिलाओं से जुड़े मामलों में एएनएम को जिम्मेदार ठहराकर कार्रवाई की जा रही है, जिसका संघ ने कड़ा विरोध किया है।
संघ का कहना है कि महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एएनएम) स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला हैं। वे सीमित संसाधनों और आवश्यक उपकरणों के अभाव में भी गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं की देखभाल, समय पर पंजीकरण, जांच, परामर्श, टीकाकरण, परिवार कल्याण सेवाएं, आयुष्मान कार्ड, टीबी एवं कुष्ठ रोग सर्वे सहित अनेक योजनाओं का संचालन करती हैं। इसके अलावा यू-विन, पीसीटीएस, एनसीडी और निश्चय जैसे विभिन्न पोर्टलों पर नियमित डेटा एंट्री का कार्य भी करती हैं।
संघ ने कहा कि एएनएम अपने कार्यक्षेत्र में उच्च जोखिम (एचआरपी) वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें समय पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करती हैं। इसके बावजूद बाद में होने वाली प्रसूता मृत्यु के लिए एएनएम को दोषी ठहराना अनुचित है। साथ ही अधिकारियों द्वारा मानसिक दबाव बनाना भी न्यायसंगत नहीं है।
ज्ञापन में मांग की गई कि उच्च जोखिम (एचआरपी) गर्भवती एवं प्रसूता मृत्यु के मामलों में एएनएम को दोषी नहीं ठहराया जाए तथा उन पर अतिरिक्त कार्यों का बोझ न डाला जाए। साथ ही एचआरपी मामलों की आरसीएच पोर्टल पर एंट्री से संबंधित धारा-17 (लघु शास्ति) के तहत जारी कार्रवाई एवं वेतन वृद्धि में शिथिलता बरती जाए।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो एलएचवी/एएनएम संघ ऑफ राजस्थान पूरे राज्य में गांधीवादी तरीके से धरना-प्रदर्शन एवं हड़ताल करेगा, जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार एवं शासन-प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान एएनएम लीला मीणा, रेखा मीणा, शिला गुर्जर, टीना मीणा, सोनल, शारदा रेगर, चंद्रकांता धाकड़, पूजा मीणा, सोमती गुर्जर, नीतू, अनुराधा, नीलम मीणा, पारस सहित अनेक एएनएम उपस्थित रहीं।
