मामले में अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता मुकेश सुवालका ने पैरवी की।
संपत्ति विवाद से जुड़ा था मामला
प्रकरण के अनुसार प्रार्थी रतनदास ने हमीरगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि उसके पिता द्वारा खरीदे गए पुराने नोहरे (बाड़े) को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप था कि जब वह नोहरे का सौदा बालू जाट को कर कब्जा सौंपने गया, तब रामेश्वर लाल दरोगा और धापू देवी वहां पहुंचे तथा जमीन नहीं बेचने की बात कहते हुए उसके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। प्रार्थी पक्ष की ओर से इस दौरान हाथ में फ्रैक्चर होने का भी आरोप लगाया गया था।
अभियोजन ने पेश किए 6 गवाह
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 6 गवाहों के बयान कराए गए तथा विभिन्न दस्तावेज और मेडिकल रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की गईं।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता मुकेश सुवालका ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष घटना को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य भी आया कि घटनास्थल के आसपास घनी आबादी होने के बावजूद पुलिस द्वारा तैयार नक्शा मौका में किसी स्वतंत्र गवाह अथवा पड़ोसी के हस्ताक्षर नहीं कराए गए।
कथित लकड़ी भी बरामद नहीं हुई
न्यायालय के समक्ष यह भी सामने आया कि मारपीट में इस्तेमाल की गई कथित लकड़ी बरामद नहीं की गई थी। वहीं चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवनारायण यादव की गवाही में एक्स-रे रिपोर्ट में हड्डी के फ्रैक्चर के बीच स्पष्ट गैप नहीं दिखाई देने तथा चोटें कठोर धरातल पर गिरने से भी आने की संभावना का उल्लेख सामने आया। प्रार्थी के शरीर पर कुल दो चोटें पाई गई थीं।
मामले की पत्रावली में दोनों पक्षों के बीच पूर्व में भी मामले दर्ज होने तथा विवाद के पुरानी रंजिश से जुड़े होने की बात सामने आई।
संदेह का लाभ देकर किया दोषमुक्त
न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल नहीं रहा।
इसके चलते न्यायालय ने रामेश्वर लाल दरोगा एवं श्रीमती धापू देवी, निवासी जवासिया, थाना हमीरगढ़, जिला भीलवाड़ा को संदेह का लाभ देते हुए धारा 341, 323 एवं 325/34 भा.दं.सं. के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।