गिरधर पुरा सरपंच व घोटाले बाज ग्राम विकास अधिकारी पर कार्यवाही कब तक- कपिल भील
झालरापाटन -स्मार्ट हलचल|सरपंच बोला मंत्री , सीईओं, राजेन्द्र निमेष , लोकपाल विकास अधिकारी, प्रधान सब के पास कमीशन जाता है। कोई कुछ नहीं बिगाड सकता, ज्यादा से ज्यादा जांच करने आ जायेंगे पांच पचास हजार रुपए में समाचार को असत्य व भ्रष्टाचार पर ईमानदार धारी की मोहर लगा जायेंगे। हकिकत बयां करते सरपंच की जुबानी है जो हमारे संवाददाता को खरीदने के दौरान सरपंच मोहन लाल मीणा ने कहें थे।
ग्राम पंचायत में लाखों रुपए का घोटाला है लेकिन जांच के नाम पर पंचायत राज विभाग जेब खाली है।
नये मामले और सामने आये जिसमें ग्राम पंचायत गिरधरपुरा में सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी की मिली भगत सरपंच ने अपने निजी फायदे के लिए अपने घर वालों और अपने क्षेत्र के लोगों को ग्राम पंचायत के खाते से कर रखा है , सफाई कार्य की एवज में सफाई कर्मियों को भुगतान करने की जगह सरपंच ने अपने घर के सदस्य अपने भाई माता, भाई की पत्नी, सरपंच की पत्नी और बहन को किया भुगतान कर रखा है। भुगतान करने वाले का नाम सावित्रीबाई ,मोहन भाई ,गोविंद प्रसाद ,पिंकी भाई ,उर्मिलाबाई को नाली सफाई और नाली निर्माण और इंटरलॉकिंग निर्माण के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान किया। सोचने वाली यह बात है कि क्या यह लोग नाली की सफाई करने के लिए गए थे या नाली निर्माण में उनके द्वारा काम किया गया या इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य करने के लिए सरपंच ने अपनी मम्मी भाई और पत्नी को भेजा था नहीं भेजा तो नियम विरुद्ध इनका भुगतान कैसे हुआ। दूसरा सबसे बड़ा घोटाला इंटरलॉकिंग खरजा मय नाली निर्माण छोटे मंदिर चौक से लेकर सीताराम मामा के मकान तक जिसका कार्य कोड 52140057 जिसका साढ़े सात लाख रुपए का भुगतान किया गया है। फिर इसी जगह दो बार और अलग-अलग कार्य के नाम से राशि उठाई गई जिनके नाम इस प्रकार हैं। नाली निर्माण मनोहर लाल के मकान से सीताराम मामा के मकान तक कार्य कोड 52140027 इसके द्वारा भुगतान राशि दो लाख तीस हजार रुपए फिर दुबारा से एक बार और फिर इसी जगह का कार्य स्वीकृत करवा कर फिर भुगतान उठाया। जिस कार्य का नाम नाली निर्माण कार्य मनोहर लाल के मकान से छोटे मंदिर की ओर जिसका कार्य कोड 52139992 इस कार्य की एवज में 285000 रुपए उठाए गए। तीनों बार के भुगतान को जोड़ तो कुल टोटल 12 लाख रुपए हुए। जबकि मौके पर 5 लाख का कार्य भी नहीं हुआ। क्योंकि उसे जगह पर पूर्व सरपंच के कार्यकाल की डी सी डाली हुई थी नालियां बनी हुई थी इस डीसी के ऊपर इंटरलॉकिंग लगा दी गई नालियों को थोड़ा काट पीट कर नया कर दिया गया। सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी ने बहुत अच्छा रास्ता चुना जनता के पैसे को खाने का कार्य एक करवाया जाता है और इस कार्य के नाम से दो-तीन बार अलग-अलग कार्य स्वीकृत करके भुगतान उठा लिया जाता है। नाली सफाई और गांव की सफाई के नाम पर कभी 20000 रुपये कभी 30000
रूपए कभी 50000 रुपए बिल का भुगतान भुगतान कर रखा है निकिता एंटरप्राइजेज को गांव में साफ सफाई और नाली सफाई तो गांव के मजदूर करते हैं फिर फर्म को भुगतान क्यों ट्रैक्टर में कचरा उठाने का इतना भुगतान नहीं होता है नाली सफाई के नाम पर पहले ठेका नहीं हुआ था तब लाखों रुपए का भुगतान उठा रखा है और कचरा पात्र जिनका एक लाख भुगतान उठाया कहीं पर नजर नहीं आते ग्राम पंचायत में कहां पर कचरा पात्र डस्टबिन रखे गए ग्रामीणों को पता ही नहीं ना ही सार्वजनिक जगह पर नजर आते हैं। सिर्फ भुगतान उठा गया। फर्म का टैंडर निकिता इन्टरप्राइजेज से है जिसका प्रोपराइटर सालरी का सरपंच है जो गिरधर पुरा सरपंच आपस में मौसी बुआ के भाई भाई है।













