ऊकरूंद की टूटी पुलिया पर सिस्टम खामोश!

ट्रैक्टर-टैंकर गिरने से तबाह हुई पुलिया, अब ग्रामीणों के लिए बनी आफत—सड़क निर्माण भी अटका, हादसे की आशंका से सहमे लोग
मंडावर उपखंड मुख्यालय के समीप की तस्वीर, जिम्मेदारों की अनदेखी पर ग्रामीणों में भारी रोष

नीरज मीणा

मंडावर। स्मार्ट हलचल/उपखंड मुख्यालय मंडावर के समीप ग्राम ऊकरूंद में एक क्षतिग्रस्त पुलिया ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। गांव में उमराव मीणा के घर के समीप तालाब पर बनी पुलिया पूर्व में ट्रैक्टर-टैंकर के गिरने से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। हादसे के बाद पुलिया की हालत लगातार खराब बनी हुई है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार अब तक सड़क और पुलिया का स्थायी निर्माण नहीं होने से समस्या जस की तस बनी हुई है।
एक हादसे ने खोली व्यवस्था की पोल
ट्रैक्टर-टैंकर के पुलिया में गिरने के बाद पुलिया को हुए नुकसान ने इसकी मजबूती और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे। हादसे के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जिम्मेदार विभाग तत्काल मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण करवाएगा। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि समय गुजरता गया और समस्या का समाधान नहीं हुआ।
आज स्थिति यह है कि ग्रामीणों को मजबूरी में इसी मार्ग से आवागमन करना पड़ रहा है। सड़क और पुलिया की खराब हालत के कारण वाहन चालकों को काफी सावधानी बरतनी पड़ती है।
रोजमर्रा का रास्ता बना जोखिम का रास्ता
यह मार्ग ग्रामीणों के दैनिक आवागमन से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों को खेतों, आसपास के क्षेत्र और मंडावर की ओर आने-जाने में इस रास्ते का उपयोग करना पड़ता है। पुलिया की क्षतिग्रस्त स्थिति के कारण दोपहिया वाहन चालकों, पैदल राहगीरों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए परेशानी बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है। क्षतिग्रस्त हिस्से का अंदाजा नहीं लगने पर वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं।
बरसात आई तो बढ़ेगी मुसीबत
तालाब के पास बनी पुलिया होने के कारण बरसात के दौरान समस्या और गंभीर होने की आशंका है। पानी का स्तर बढ़ने, कीचड़ जमा होने और रास्ता खराब होने से आवागमन बाधित हो सकता है। ऐसे में ग्रामीणों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान किसी अनहोनी से पहले पुलिया और सड़क का निर्माण कराया जाना बेहद जरूरी है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा—‘किसी की जान जाने के बाद जागेंगे जिम्मेदार?’
पुलिया की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने कहा कि—
“पुलिया पहले ही हादसे में टूट चुकी है। अब भी अगर इसका निर्माण नहीं कराया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। जिम्मेदारों को किसी की जान जाने का इंतजार नहीं करना चाहिए।”
एक अन्य ग्रामीण ने कहा—
“यह समस्या आज की नहीं है। हम लंबे समय से परेशानी झेल रहे हैं। अधिकारियों को मौके पर आकर स्थिति देखनी चाहिए। सड़क और पुलिया का स्थायी निर्माण ही इसका समाधान है।”
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांवों की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण समस्याओं पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता। जब कोई बड़ा हादसा होता है, तभी प्रशासन हरकत में आता है।
ग्रामीणों की दो टूक—अब आश्वासन नहीं, निर्माण चाहिए
ग्रामीणों ने प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि ऊकरूंद में उमराव मीणा के घर के समीप तालाब की क्षतिग्रस्त पुलिया का मौके पर निरीक्षण कराकर जल्द से जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए। साथ ही पुलिया से जुड़े सड़क मार्ग को भी दुरुस्त कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुलिया का निर्माण केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
सबसे बड़ा सवाल—हादसे के बाद भी क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
ट्रैक्टर-टैंकर के गिरने से पुलिया क्षतिग्रस्त होने के बाद भी यदि उसका स्थायी समाधान नहीं हुआ है तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जिम्मेदार विभाग की नजर इस समस्या पर कब पड़ेगी?
ग्रामीणों की मांग साफ है—
“हादसे का इंतजार मत करो, पुलिया बनाओ और रास्ता सुरक्षित करो।”
अब देखना यह है कि ग्रामीणों की आवाज जिम्मेदार अधिकारियों तक कब पहुंचती है और ऊकरूंद की इस जमीनी समस्या का समाधान कब धरातल पर दिखाई देता