भीलवाड़ा के देवेंद्र सिंह ने दुनिया को दिखाई भारतीय तकनीक की ताकत, छोटी-सी शुरुआत से 40 से अधिक देशों तक पहुंची बॉलिंग मशीन

अब AI तकनीक से लैस 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली मशीन तैयार, क्रिकेट अभ्यास में आएगा नया दौर

भीलवाड़ा।स्मार्ट हलचल।राजस्थान का भीलवाड़ा अब केवल टेक्सटाइल उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि खेल तकनीक (स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी) में भी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। इसकी मिसाल हैं तिलक नगर निवासी देवेंद्र सिंह राजपूत, जिन्होंने एक छोटे शहर से बड़े सपने देखने का साहस किया और अपनी मेहनत, नवाचार तथा तकनीकी सोच के दम पर ऐसी क्रिकेट बॉलिंग मशीन विकसित की, जो आज 40 से अधिक देशों में खिलाड़ियों के अभ्यास का हिस्सा बन चुकी है।

कभी सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुआ यह सफर आज अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच गया है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों की क्रिकेट अकादमियों, क्लबों और प्रशिक्षण केंद्रों में भीलवाड़ा में बनी बॉलिंग मशीन का उपयोग किया जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल देवेंद्र सिंह के लिए बल्कि राजस्थान और भारत के लिए भी गर्व का विषय है।

छोटे शहर से निकला बड़ा नवाचार

देवेंद्र सिंह का मानना है कि प्रतिभा किसी महानगर की मोहताज नहीं होती। उन्होंने क्रिकेट खिलाड़ियों को बेहतर अभ्यास सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बॉलिंग मशीन बनाने का काम शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी। आर्थिक सीमाएं, तकनीकी चुनौतियां और संसाधनों की कमी जैसी कई बाधाएं सामने आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार अनुसंधान, परीक्षण और सुधार के बाद उन्होंने ऐसी मशीन तैयार की, जिसने अपनी गुणवत्ता और सटीकता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में जगह बना ली।

आज उनकी कंपनी के विभिन्न मॉडल देश-विदेश में उपयोग किए जा रहे हैं और लगातार नए ऑर्डर मिल रहे हैं।

अब AI तकनीक से लैस होगी नई मशीन

देवेंद्र सिंह अब क्रिकेट प्रशिक्षण को और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनकी नई बॉलिंग मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से लैस होगी, जो बल्लेबाजों को वास्तविक तेज गेंदबाज के सामने खेलने जैसा अनुभव देगी।

नई मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक गेंद फेंकने की क्षमता होगी। वर्तमान में अधिकांश बॉलिंग मशीनें करीब 165 किलोमीटर प्रति घंटे तक ही गेंदबाजी कर पाती हैं। इससे तेज गति के अलावा गेंद की लाइन, लेंथ और विविधता को भी बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।

मोबाइल ऐप से होगी पूरी मशीन संचालित

नई मशीन को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। इसे मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकेगा। कोच या प्रशिक्षक मोबाइल से ही गेंद की स्पीड, लेंथ, एंगल और अन्य सेटिंग्स बदल सकेंगे। मशीन में फिलहाल 18 गेंदों की ऑटो फीडिंग क्षमता होगी, जिसे भविष्य में 250 गेंदों तक बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है।

इस तकनीक से खिलाड़ियों को लगातार बिना रुकावट अभ्यास करने का अवसर मिलेगा और प्रशिक्षण अधिक प्रभावी होगा।

80 हजार से 18 लाख तक के मॉडल

देवेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी के 13 से 14 मॉडल बाजार में उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 80 हजार रुपये से लेकर 4.25 लाख रुपये तक है। वहीं AI तकनीक से लैस अत्याधुनिक मॉडल की अनुमानित कीमत करीब 18 लाख रुपये होगी। यह मशीन विशेष रूप से प्रोफेशनल क्रिकेट अकादमियों, स्टेडियमों और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों के लिए विकसित की जा रही है।

‘मेक इन इंडिया’ की मिसाल बना भीलवाड़ा

एक समय था जब भारत को इस तरह की आधुनिक मशीनों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन आज भीलवाड़ा में बनी मशीनें विदेशी कंपनियों को चुनौती दे रही हैं। यह सफलता ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की भावना को भी मजबूत करती है।

देवेंद्र सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल मशीन बनाना या बेचना नहीं, बल्कि भारतीय खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय तकनीक उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें विदेशों पर निर्भर न रहना पड़े।

युवाओं के लिए प्रेरणा

देवेंद्र सिंह राजपूत की सफलता यह साबित करती है कि यदि सोच बड़ी हो, मेहनत ईमानदार हो और लक्ष्य स्पष्ट हो तो छोटे शहर भी दुनिया के नक्शे पर अपनी पहचान बना सकते हैं। भीलवाड़ा जैसे शहर से शुरू हुई एक छोटी-सी पहल आज 40 से अधिक देशों तक पहुंच चुकी है और भारतीय नवाचार की नई कहानी लिख रही है।

क्रिकेट जगत में उनकी यह उपलब्धि न केवल तकनीकी विकास का उदाहरण है, बल्कि देश के युवाओं के लिए यह संदेश भी है कि सपने बड़े हों तो सफलता की कोई सीमा नहीं होती।