दंतेवाड़ा में नक्सलियों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे भीलवाड़ा के वीर सपूत खमाण लाल गुर्जर

दिनेश साहू आसींद

​आसीन्द (भीलवाड़ा)। स्मार्ट हलचल।देश की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिक इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। ऐसा ही एक गौरवशाली नाम है भीलवाड़ा जिले की आसीन्द तहसील के ग्राम गोपालपुरा के वीर सपूत शहीद खमाण लाल गुर्जर का, जिन्होंने नक्सलियों के कायरतापूर्ण हमले का पूरी बहादुरी से सामना करते हुए देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।
​केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (के०रि०पु०बल) की 31वीं बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात खमाण लाल गुर्जर की शहादत की गाथा आज भी युवाओं में देशभक्ति का जज्बा पैदा करती है।

​घात लगाकर किया गया था हमला
​घटना 21 मई 2006 की है, जब छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के पुलिस स्टेशन बिरमगढ़ के अंतर्गत गणेश बहार नाले पर माओवादियों ने एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया था। माओवादियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 16 को अवरुद्ध करने के उद्देश्य से सड़क पर पेड़ काट दिए थे और भारी मात्रा में आईईडी (IED) बिछा रखे थे।
​जैसे ही राष्ट्रीय राजमार्ग के अवरुद्ध होने और माओवादियों की हलचल की सूचना के०रि०पु०बल की 31वीं बटालियन को मिली, बल की एक टुकड़ी तुरंत बिना वक्त गंवाए घटना स्थल की ओर रवाना हुई। सिपाही खमाण लाल भी इस टुकड़ी का हिस्सा थे। जैसे ही सैनिकों की टुकड़ी गणेश बहार नाले के पास पहुँची, घात लगाकर बैठे माओवादियों ने अचानक हमला बोल दिया और जोरदार आईईडी विस्फोट कर दिया।
​घायल होने के बावजूद नहीं मानी हार
​इस भयानक बारूदी विस्फोट की चपेट में आने से सिपाही खमाण लाल बुरी तरह घायल हो गए। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कोई भी आम इंसान हिम्मत हार बैठता, लेकिन खमाण लाल के सीने में देशप्रेम और वीरता का लहू उबल रहा था। गंभीर रूप से लहूलुहान होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी राइफल थामी और माओवादियों पर जवाबी हमला बोल दिया। घायल अवस्था में ही उन्होंने अकेले कई माओवादियों का डटकर मुकाबला किया और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर करते हुए दुश्मन खेमे को भारी नुकसान पहुँचाया।
​लगातार मुकाबला करते हुए जब स्थिति नियंत्रण में आई, तब तक वीर सिपाही अत्यधिक खून बह जाने के कारण अचेत हो चुके थे। उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में दिल्ली स्थित सेना के अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

​5 जुलाई को ली अंतिम सांस
​दिल्ली के अस्पताल में करीब डेढ़ महीने तक जीवन और मृत्यु के बीच चले संघर्ष के बाद, अंततः 5 जुलाई 2006 को इस जांबाज सैनिक ने अपनी अंतिम सांस ली और वीरगति को प्राप्त हो गए।
​शहीद खमाण लाल गुर्जर की यह शहादत देश हमेशा याद रखेगा। उनकी वीरता ने न केवल उनके परिवार और भीलवाड़ा जिले का, बल्कि पूरे राजस्थान और देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। आज उनकी शहादत की बरसी के अवसर पर पूरा देश इस वीर सपूत को नमन करता है और उनकी वीरांगना पत्नी श्रीमती मंजू देवी एवं उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता प्रकट करता है।

​शहीद परिचय एवं विवरण:
​नाम: शहीद खमाण लाल गुर्जर
​पद व बटालियन: सिपाही, 31 बटालियन, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)
​शहादत की तिथि: 05 जुलाई 2006
​उत्तराधिकारी: श्रीमती मंजू देवी (पत्नी)
​स्थायी पता: ग्राम – गोपालपुरा, पोस्ट – दड़ावत, तहसील – आसीन्द, जिला – भीलवाड़ा (राजस्थान), पिन – 311301