भीलवाड़ा की 150+ प्राइवेट कॉलोनियां बदहाल: न पानी, न सड़क, न लाइट

“पट्टे दिए तो सुविधा क्यों नहीं” – कॉलोनीवासी आक्रोशित, अमृत 2 योजना पर सवाल

भीलवाड़ा, पवन बावरी। शहर की 150 से अधिक प्राइवेट कॉलोनियों के हालात बद से बदतर हो गए हैं। इन कॉलोनियों में न चंबल का पानी पहुंच रहा है और न ही मूलभूत सुविधाएं। कॉलोनीवासियों में नगर विकास न्यास और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आक्रोश है।

नगर विकास न्यास और जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई परिणाम नहीं निकला। पीने के पानी की समस्या के अलावा सड़कें टूटी पड़ी हैं और नालियां अटी होने से पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है। हल्की बारिश में ही सड़कें नदियों में तब्दील हो जाती हैं।

*”पट्टे दिए तो जिम्मेदारी क्यों नहीं”*
कॉलोनी निवासी प्रकाश शर्मा ने कहा _”हमारी कॉलोनी में पानी, रोड लाइट, सड़क समेत कई समस्याएं हैं। अधिकारियों से शिकायत की तो जवाब मिला प्राइवेट कॉलोनी है इसलिए कुछ नहीं कर सकते। यदि न्यास सुविधा नहीं दे सकता तो पट्टे क्यों दिए। 10 साल से कॉलोनी में रह रहा हूं, कुछ नहीं हुआ।”_

गृहणी चंचल शर्मा ने कहा _”सड़कों में गड्ढों के कारण बच्चे स्कूल जाने में दिक्कत होती है। बारिश में गड्ढे नहीं दिखते। कोई बड़ा हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा। पीने के पानी के लिए 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।”_

रेणु गुर्जर ने बताया _”10 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। न सड़क है न पानी। कई बार कलेक्ट्रेट पर ज्ञापन दे चुके हैं लेकिन कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई।”_

सतीश कुमार सोनी ने कहा _”रोड लाइट नहीं होने से रात में चोरी का खतरा रहता है। सड़कों पर निकलना भी मुश्किल है। समय पर विकास नहीं होने से सड़कें टूटी हैं।”_

*खाली भूखंडों में भरा पानी, जंगली जीवों का खतरा*
कई खाली पड़े भूखंडों में पानी भर जाने से मच्छर और जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बढ़ गया है।

*अमृत 2 योजना पर सवाल*
भीलवाड़ा की प्राइवेट कॉलोनियों में अमृत 2 योजना के तहत पानी पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है।

विधायक अशोक कोठारी ने अधिकांश प्राइवेट कॉलोनियों का निरीक्षण किया और हालात सुधारने की कोशिश भी की, लेकिन अधिकारियों के उदासीन रवैये और सुझावों के अभाव में विकास नहीं हो पाया।

कॉलोनीवासियों की मांग है कि न्यास और सरकार तुरंत पानी, सड़क और लाइट की व्यवस्था करे, अन्यथा उग्र आंदोलन किया जाएगा।