महेन्द्र नागौरी
खाद्य सुरक्षा टीम की कार्रवाई से मचा हड़कंप, केक नष्ट कराया; मिर्च-हल्दी सहित चार खाद्य पदार्थों के सैम्पल भरे
भीलवाड़ा|स्मार्ट हलचल|जिले में मिलावटखोरी और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की। कोटड़ी चौराहा, सवाईपुर स्थित मैसर्स जोधपुर मिष्ठान भण्डार के निरीक्षण के दौरान टीम को 25 किलो मिल्क केक दूषित मिला। विभाग ने इसे मौके पर ही नष्ट करवा दिया।
कार्रवाई के दौरान टीम ने प्रतिष्ठान से मिल्क केक और गुलाब जामुन के नमूने भी लिए। इन नमूनों को गुणवत्ता जांच के लिए राजकीय खाद्य प्रयोगशाला, अजमेर भेजा गया है। अब प्रयोगशाला रिपोर्ट से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
त्रिवेणी चौराहे पर भी पहुंची टीम
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने इसी अभियान के तहत पारवानी ट्रेडर्स, त्रिवेणी चौराहा का भी निरीक्षण किया। यहां से मिर्च पाउडर और हल्दी पाउडर के नमूने लिए गए। इस तरह अभियान के दौरान कुल चार खाद्य पदार्थों के सैम्पल जांच के लिए भेजे गए हैं।
रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
विभाग के अनुसार सभी नमूनों को राजकीय खाद्य प्रयोगशाला, अजमेर भेजा गया है। प्रयोगशाला से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देशानुसार की गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अशोक यादव एवं साक्षी जैन कार्रवाई के दौरान मौजूद रहे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में मिलावटखोरी और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों की बिक्री के खिलाफ निरीक्षण एवं सैम्पलिंग अभियान लगातार जारी रहेगा। विभाग का उद्देश्य आमजन को सुरक्षित, शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।
त्योहारी सीजन में बढ़ी जिम्मेदारी
खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ने के साथ विभाग की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। आमजन से अपील की गई है कि खाद्य सामग्री खरीदते समय पैकेजिंग, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और गुणवत्ता की जांच जरूर करें।
मिलावट की आशंका होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग के कार्यालय के दूरभाष 01482-232643 पर सूचना दी जा सकती है।
फिलहाल 25 किलो मिल्क केक नष्ट कराया जा चुका है, जबकि लिए गए चार नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जांच में लिए गए खाद्य पदार्थ निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों पर कितने खरे उतरते हैं।
