एनएसयूआई के विरोध के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने विवादित आदेश किया निरस्त

एबीवीपी कार्यक्रम में विद्यार्थियों-शिक्षकों की भागीदारी संबंधी आदेश वापस, एनएसयूआई ने इसे छात्र हितों की जीत बताया

चित्तौड़गढ़, स्मार्ट हलचल। राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के विरोध-प्रदर्शन के बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को एबीवीपी के कार्यक्रम में भाग लेने के संबंध में जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। एनएसयूआई ने इसे अपने आंदोलन की सफलता और छात्र हितों की जीत बताया है।

एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अल्पेश गोस्वामी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षा विभाग पर सरकारी विद्यालयों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करने का आरोप लगाते हुए संबंधित आदेश को वापस लेने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। बाद में जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया।

अल्पेश गोस्वामी ने कहा कि सरकारी विद्यालय शिक्षा के मंदिर हैं और उन्हें किसी भी राजनीतिक दल या उससे जुड़े छात्र संगठन के कार्यक्रमों का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों को राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल करने के लिए सरकारी तंत्र का उपयोग शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि एनएसयूआई ने शुरुआत से ही इस आदेश का विरोध किया था और स्पष्ट किया था कि शिक्षा को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। उनके अनुसार संगठन के आंदोलन, विरोध और जनदबाव के बाद जिला शिक्षा अधिकारी को आदेश निरस्त करना पड़ा, जो छात्र हितों, शिक्षा की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत है।

एनएसयूआई ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि शिक्षा विभाग का किसी भी राजनीतिक उद्देश्य से दुरुपयोग किया गया तो संगठन और व्यापक आंदोलन करेगा तथा छात्र हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।