सहादत नगर स्कूल की दरारों में दफन बचपन,बरसात से पहले उठे सवाल: क्या पिपलोद जैसी 10 लाशें चाहिए तब जागेगा प्रशासन।

—->घटिया निर्माण,राजनीतिक दबाव, बच्चों की मौत का फॉर्मूला: सहादत नगर स्कूल का सच।

महेंद्र कुमार सैनी

नगर फोर्ट:स्मार्ट हलचल/राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र के पिपलोद गांव में स्कूल की छत ढहने से 7-10 मासूम बच्चों की मौत का दर्द अभी ताजा है, लेकिन टोंक जिले के उनियारा उपखंड क्षेत्र का सहादत नगर स्कूल भी उसी हादसे की दहलीज पर खड़ा है।
3 साल से घटिया निर्माण, फिर भी प्रशासन मौन साल 2022 से स्कूल भवन का घटिया निर्माण हो रहा है। 3 साल बीत जाने के बाद भी शाला प्रबंधन समिति स्कूल मैनेजमेंट कमिटी की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई। तत्कालीन प्रधानाध्यापक महावीर मीणा से लेकर वर्तमान प्रधानाध्यापक युवराज चंदेल तक की हठधर्मिता सामने आई है। आरोप है कि दोनों प्रधानाध्यापक प्रशासनिक व राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं।ज्वलंत समस्या पर मनमर्जी के प्रस्ताव, कार्यवाही शून्य स्कूल मैनेजमेंट कमिटी की बैठकों में मनमर्जी के प्रस्ताव तो लिए गए, लेकिन जर्जर स्कूल भवन की घटिया निर्माण समस्या पर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नतीजा, पहले भी घटिया निर्माण हुआ और अब हालात और बिगड़ गए हैं।कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा एक-दो दिन पहले ही स्कूल के एक कमरे में फिर से हल्का झुकाव आ गया है।आधे से ज्यादा कमरों में जगह-जगह गहरी दरारें पड़ चुकी हैं।बरसात का मौसम सिर पर है। बारिश होते ही छत या दीवार गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है। प्रधानाध्यापक बाइट देने से कर रहे इनकार
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब वर्तमान प्रधानाध्यापक युवराज चंदेल से पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कैमरे पर बाइट देने से साफ इनकार कर दिया।
*पिपलोद जैसा हादसा दोहराने का डर*
2025 में झालावाड़ के पिपलोद गांव में सरकारी स्कूल की छत ढहने से 7 से 10 बच्चों की मौत हो गई थी। सहादत नगर स्कूल की हालत देखकर अभिभावकों में दहशत है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात आने वाली है, बच्चों के साथ खिलवाड़ बंद हो। प्रशासन तुरंत संज्ञान लेकर भवन को असुरक्षित घोषित करे और बच्चों को दूसरी जगह शिफ्ट करे, वरना पिपलोद जैसा दर्दनाक हादसा फिर दोहराया जा सकता है।जिला था प्रशासन व शिक्षा विभाग तुरंत जांच करवाकर दोषियों पर कार्यवाही करे और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।