बद्री लाल माली
गुरला:स्मार्ट हलचल|राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गुरला ग्राम पंचायत के मोमी गांव में इन दिनों एक अनोखी चर्चा जोर पकड़ रही है। अमूमन एक-दूसरे के धुर विरोधी रहने वाले राजनीतिक दलों के जमीनी स्तर के समीकरण बदलते दिख रहे हैं। हाल ही में मोमी गांव से ऐसे मामले सामने आए हैं जहां कांग्रेस पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के शिलान्यास और उद्घाटन समारोहों में भीड़ जुटाते और लोगों को प्रोत्साहित करते नजर आए हैं।इतना ही नहीं, ये कार्यकर्ता मोमी गांव की आम जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। इस बदलते घटनाक्रम ने गुरला ग्राम पंचायत क्षेत्र में राजनीतिक कयासों का बाजार गर्म कर दिया है।
*अंदरूनी गुटबाजी या सरकारी लाभ की चाह?*
मोमी गांव के स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है कि क्या ये विपक्षी कार्यकर्ता वास्तव में सत्ताधारी दल के ‘अघोषित एजेंट’ के रूप में काम कर रहे हैं। चर्चा यह भी है कि धरातल पर सक्रिय कई नेता और कार्यकर्ता सरकारी योजनाओं के आवंटन, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक पकड़ को मजबूत बनाए रखने के लिए वर्तमान सरकार के सुर में सुर मिला रहे हैं।
*पार्टी अनुशासन और नेतृत्व की चुप्पी*
इस पूरे मामले पर कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी असंतोष देखा जा रहा है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या पार्टी नेतृत्व इस तरह की अनुशासनहीनता और वैचारिक भटकाव पर संज्ञान नहीं ले रहा है? हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना एक नागरिक का कर्तव्य है, लेकिन विरोधी दल की नीतियों और कार्यक्रमों का सक्रिय प्रचार करना निश्चित रूप से पार्टी विरोधी गतिविधि के दायरे में आता है।गुरला क्षेत्र के इस जमीनी फेरबदल और मोमी गांव के कार्यकर्ताओं के इस ‘हृदय परिवर्तन’ पर कांग्रेस आलाकमान आने वाले दिनों में क्या कड़ा रुख अपनाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
