सूर्यमहल में कल से गूंजेगी आचार्य पुलकसागर महाराज की दिव्य देशना, 30 अक्टूबर तक चलेगी प्रवचन श्रृंखला

विजयादशमी पर नवग्रह अनुष्ठान की पूर्णाहुति, 100 हवन कुंडों में दी जाएगी आहुतियां; श्रद्धालु ग्रहण करेंगे अणुव्रत संस्कार
भीलवाड़ा, 19 अक्टूबर। स्मार्ट हलचल|भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत आचार्य मनोज्ञ पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में 21 से 30 अक्टूबर तक जीवन जीने की कला पर आधारित मंगल दिव्य देशना का आयोजन होगा। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट, मेन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से आयोजित इस अंतिम चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में प्रतिदिन सुबह 8.45 से 10 बजे तक श्रद्धालुओं को आचार्यश्री के मुखारविंद से धर्म, अध्यात्म और जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा मिलेगी। वहीं, शाम 6.30 से 7.30 बजे तक आनंद यात्रा (प्रश्न मंच) का आयोजन किया जाएगा।
इससे पहले नवरात्र में आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में आयोजित सौभाग्य संवर्धक महोत्सव के तहत भगवान पार्श्वनाथ विधान एवं नवग्रह जाप अनुष्ठान की पूर्णाहुति विजयादशमी के पावन अवसर पर मंगलवार को होगी। इस दौरान करीब 100 हवन कुंडों में नवग्रह की आहुतियां देकर सामूहिक पूर्णाहुति अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा। आयोजन में सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग ले रहे हैं। अनुष्ठान में भाग्यांक, मूलांक अथवा नामांक के आधार पर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि सोमवार को भाग्यांक सात और केतु ग्रह से संबंधित श्रावक-श्राविकाओं ने अनुष्ठान संपन्न किया। विजयादशमी पर होने वाले पूर्णाहुति हवन में उन श्रद्धालुओं को भी शामिल होने का अवसर मिलेगा, जो किसी कारणवश अब तक अनुष्ठान में भाग नहीं ले पाए हैं। श्रद्धालुओं को उनके भाग्यांक एवं ग्रह के अनुसार वस्त्र प्रदान किए जाएंगे। सौभाग्य संवर्धक महोत्सव के समापन पर भाग्यांक एक से नौ तक के उन पुण्यार्जकों का सामूहिक निष्ठापन अनुष्ठान भी होगा, जिन्होंने नवग्रह अनुष्ठान में भाग लिया है। इस अवसर पर उन्हें अभिमंत्रित माला भी प्रदान की जाएगी।
विजयादशमी पर आचार्यश्री के सानिध्य में अणुव्रत संस्कार का भव्य आयोजन भी होगा। इसमें श्रावक-श्राविकाएं अपनी श्रद्धा, भावना और सामर्थ्य के अनुरूप छोटे-छोटे व्रत स्वीकार कर जीवन को संयमित एवं पवित्र बनाने का संकल्प लेंगे। इन अणुव्रतों में नियमित जिनेंद्र भगवान की आराधना, रात्रि भोजन का त्याग, जमीकंद का त्याग तथा नियमित मंदिर जाकर अभिषेक करने जैसे संकल्प शामिल हैं।
समिति अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने अधिकाधिक श्रावक-श्राविकाओं से पूर्णाहुति अनुष्ठान में शामिल होकर पुण्यार्जन करने तथा आचार्यश्री से अपनी भावना और क्षमता के अनुसार अणुव्रत संस्कार ग्रहण कर जीवन को सुखद, संयमित एवं संस्कारवान बनाने की अपील की है।