अनिल कुमार
स्मार्ट हलचल।ब्यावर राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा पंचायत एवं स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। माननीय न्यायालय ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को कड़े निर्देश देते हुए आगामी 31 जुलाई तक हर हाल में पंचायत और निकाय चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है। कांग्रेस ने अदालत के इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र और संविधान की बड़ी जीत बताया है।
ब्यावर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी मनोज चौहान ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को पंगु बनाने की कोशिश कर रही थी और जनता के बीच बढ़ती नाराजगी व हार के डर से स्थानीय चुनावों को जानबूझकर टाला जा रहा था।
चौहान ने कहा, “लोकतंत्र में जनता को समय पर अपने प्रतिनिधि चुनने का संवैधानिक अधिकार है। पंचायत और निकाय चुनाव हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद हैं, लेकिन राज्य सरकार ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस पूरी प्रक्रिया को बाधित किया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले से यह साफ कर दिया है कि लोकतंत्र में चुनावों को टालना कतई स्वीकार्य नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता बूथ स्तर तक लोकतंत्र को बचाने का संघर्ष कर रहे हैं और यह फैसला उसी संघर्ष का परिणाम है। स्थानीय निकाय सिर्फ प्रशासनिक इकाइयां नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा हैं, जिनके ठप होने से विकास कार्य रुक जाते हैं।
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में हर्ष की लहर
हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद ब्यावर और आसपास के क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं ने खुशी जाहिर की है। फैसले का स्वागत करने वालों में वरिष्ठ नेता प्रवीण जैन, महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष इशिका जैन, जिला प्रवक्ता एडवोकेट रामस्वरूप सेवालिया, महासचिव राजेश शर्मा, चेतन सांखला, टीकम सिंह कड़ीवाल, नगर कांग्रेस अध्यक्ष भारत बाघमार, जवाजा ब्लॉक अध्यक्ष धर्म सिंह भाटी, आरजीपीआरएस प्रदेश सचिव शैलेश शर्मा, जिला अध्यक्ष राम यादव और ब्लॉक अध्यक्ष मुकेश लखन प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इसके साथ ही निवर्तमान पार्षद राजेंद्र तुनगरिया, भरत बांदीवाल, राकेश साहू, भुवनेश शर्मा, जीवराज जावा, गिरधारी लाल पोपावत, विकास दगदी, रामनिवास सेन, अजय स्वामी, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष अशोक रांका, हर नारायण हैड़ा, देवकरण शर्मा और पर्यावरण प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष देवेंद्र काठात सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय को प्रदेश के विकास और जनता के अधिकारों की बहाली के लिए जरूरी कदम बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय निकायों के इन चुनावों को विधानसभा का ‘सेमीफाइनल’ माना जाता है, ऐसे में हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीतिक सरगर्मियां बेहद तेज होने वाली हैं।
