2. आँख कैसे काम करती है?
- प्रकाश कॉर्निया से प्रवेश करता है।
- पुतली से होकर लेंस तक पहुँचता है।
- लेंस प्रकाश को रेटिना पर फोकस करता है।
- रेटिना प्रकाश को विद्युत संकेतों में बदलती है।
- ऑप्टिक नर्व इन्हें मस्तिष्क तक पहुँचाती है, जहाँ चित्र बनता है।
3. सामान्य नेत्र रोग
- निकट दृष्टिदोष (Myopia)
- दूर दृष्टिदोष (Hyperopia)
- एस्टिग्मैटिज्म
- मोतियाबिंद (Cataract)
- काला मोतिया (Glaucoma)
- कंजंक्टिवाइटिस (आँख आना)
- ड्राई आई (Dry Eye)
- रेटिना संबंधी रोग
4. आँखों की देखभाल
- संतुलित आहार लें (विटामिन A, C, E, ओमेगा-3)।
- हरी सब्जियाँ, गाजर, शकरकंद, अंडे और मछली का सेवन करें।
- स्क्रीन पर काम करते समय 20-20-20 नियम अपनाएँ (हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें)।
- धूप में UV सुरक्षा वाले चश्मे पहनें।
- आँखों को बार-बार न रगड़ें।
- पर्याप्त नींद लें और नियमित नेत्र परीक्षण कराएँ।
5. आँखों के लिए उपयोगी विटामिन
- विटामिन A: रतौंधी से बचाव।
- विटामिन C: आँखों की रक्त वाहिकाओं के लिए लाभदायक।
- विटामिन E: कोशिकाओं की सुरक्षा।
- ल्यूटिन और ज़ीएक्सैंथिन: रेटिना की सुरक्षा में सहायक।
- ओमेगा-3 फैटी एसिड: ड्राई आई की समस्या कम करने में मददगार।
6. तुरंत डॉक्टर से कब मिलें?
- अचानक दृष्टि कम होना
- आँख में तेज दर्द
- लगातार लालिमा या सूजन
- रोशनी की चमक या काले धब्बे दिखना
- आँख में रसायन या गंभीर चोट लगना
आँखों की नियमित देखभाल और समय-समय पर जाँच कराने से कई गंभीर नेत्र रोगों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
- मोतियाबिंद (Cataract) – आँख का लेंस धुंधला हो जाता है, जिससे दिखाई कम देने लगता है।
- काला मोतिया (Glaucoma) – यह ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुँचाने वाली बीमारी है। शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है।
- डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) – मधुमेह के कारण रेटिना की रक्त वाहिकाएँ प्रभावित हो जाती हैं।
- उम्र से संबंधित मैक्युलर डिजनरेशन (Age-related Macular Degeneration, AMD) – रेटिना के मध्य भाग (मैक्युला) को प्रभावित करती है, जिससे पढ़ने और चेहरे पहचानने जैसी केंद्रीय दृष्टि प्रभावित होती है।
