श्री जीव दया सेवा संस्था ने 7 अवैध कैद कछुओं को कराया मुक्त, अब तक 24 वन्यजीव वन विभाग को सौंपे

अनिल कुमार

ब्यावर।स्मार्ट हलचल|वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय ‘श्री जीव दया सेवा संस्था’ ने एक बार फिर सराहनीय पहल करते हुए गुरुवार को ब्यावर शहर के विभिन्न घरों से अवैध रूप से कैद कर रखे गए 7 जंगली कछुओं को रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के तुरंत बाद संस्था के पदाधिकारियों ने कछुओं को सुरक्षित वन विभाग के सुपुर्द कर दिया, जहाँ से उन्हें उनके प्राकृतिक आवास (जल निकायों) में छोड़ा जाएगा। संस्था द्वारा अब तक कुल 24 जंगली कछुओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित वन विभाग को सौंपा जा चुका है।

प्राकृतिक संतुलन और प्रजनन पर पड़ता है बुरा असर
मामले की जानकारी देते हुए संस्था के सचिव कपिल सेन ने बताया कि आजकल लोगों में जंगली कछुओं को घरों में पालने की गलत प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कछुओं का असली घर जंगल, तालाब, झील, नदियाँ और पहाड़ी जलाशय हैं। जब इन्हें प्रकृति से दूर घरों में कैद रखा जाता है, तो इनका प्राकृतिक प्रजनन रुक जाता है, जिससे इनकी प्रजाति के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगता है और पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ता है।

कानूनी चेतावनी: घर में कछुआ रखना दंडनीय अपराध
सचिव कपिल सेन ने कानून की जानकारी देते हुए बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wild Life Protection Act, 1972) के तहत संरक्षित वन्यजीवों को पकड़ना, पालना, खरीदना, बेचना या बिना अनुमति घर में रखना गैर-कानूनी है। ऐसा करने पर संबंधित अनुसूची के आधार पर कठोर दंड, जुर्माना तथा कारावास का प्रावधान है। उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि किसी के पास या आसपास कछुआ दिखे, तो उसे घर में रखने के बजाय तुरंत वन विभाग या संस्था को सूचित करें।

अभियान में ये रहे मौजूद
कछुओं को वन विभाग के सुपुर्द करते समय संस्था अध्यक्ष लालचंद साँखला, संस्था कोषाध्यक्ष डी. के. जैन, प्रचार-प्रसार मंत्री व बजरंग दल जिला संयोजक नारायण सिंह गणेशपुरा, राहुल सेन, भरत सिंह, वैभव सांखला, दक्षित तथा पुखराज सहित कई वन्यजीव प्रेमी उपस्थित रहे।

संस्था ने संकल्प जताया है कि भविष्य में भी वन विभाग के सहयोग से वन्यजीव संरक्षण एवं जन-जागरूकता अभियान निरंतर जारी रहेगा।