कैंची चलाने वाले ईश्वर सेन अब संभालेंगे पंचायत की कमान

सरपंच बनने के बाद भी नहीं छोड़ा अपना पुश्तैनी हुनर, बुधवार को दुकान पर बुजुर्ग की की कटिंग
947 वोट हासिल कर निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 477 मतों से हराया, पांच साल की जनसेवा बनी जीत का आधार

चौमहला।स्मार्ट हलचल|कहते हैं कि अगर इंसान के मन में सेवा का जज्बा हो तो वह किसी पद पर रहे या न रहे, लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है। इसका उदाहरण ग्राम पंचायत पारापीपली के नवनिर्वाचित सरपंच ईश्वर सेन हैं। पेशे से हेयर कटिंग सैलून संचालक ईश्वर सेन ने सरपंच का चुनाव जीतकर गांव की सरकार की कमान संभाली है, लेकिन अपनी मेहनत और हुनर से जुड़े काम को नहीं छोड़ा। सरपंच बनने के बाद भी बुधवार को वे चौमहला स्थित अपनी दुकान पर पहुंचे और एक बुजुर्ग की कटिंग कर अपने पुराने अंदाज में काम करते नजर आए। उनका यह सहज व्यवहार क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्राम पंचायत पारापीपली में सरपंच पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित था। चुनाव में कुल छह प्रत्याशी मैदान में थे। पंचायत क्षेत्र में 2950 मतदाताओं के बीच हुए मुकाबले में ईश्वर सेन ने 947 मत हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 477 मतों के अंतर से पराजित किया।
पांच साल से लगातार लोगों के बीच रहे ईश्वर सेन
ईश्वर सेन की जीत के पीछे पांच साल से लगातार किया जा रहा जनसंपर्क और लोगों के सुख-दुख में भागीदारी अहम मानी जा रही है। चौमहला में व्यवसाय होने के बावजूद वे पंचायत क्षेत्र के लोगों के कामकाज के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे। किसी को थाने में काम हो, अस्पताल में सहायता की जरूरत हो या किसी अन्य समस्या के समाधान के लिए सहयोग चाहिए हो, ईश्वर सेन अपनी क्षमता के अनुसार मदद के लिए आगे आते रहे।
उनका लोगों से निरंतर जुड़ाव ही उनकी पहचान बना। चुनाव के दौरान भी मतदाताओं ने उनके व्यवहार, सहज उपलब्धता और जनसेवा के अनुभव पर भरोसा जताया।
अपनी दुकान, चार कर्मचारी और अब पंचायत की जिम्मेदारी
ईश्वर सेन की चौमहला में स्वयं की हेयर कटिंग सैलून की दुकान है, जहां चार कर्मचारी कार्यरत हैं। अब सरपंच बनने के बाद उनके सामने पंचायत के विकास कार्यों और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान की बड़ी जिम्मेदारी होगी। ईश्वर सेन का कहना है कि पंचायत के कामकाज को प्राथमिकता देते हुए समय मिलने पर वे अपनी दुकान पर भी सेवाएं देते रहेंगे।
बुधवार को सरपंच बनने के बाद भी दुकान पर पहुंचकर बुजुर्ग की कटिंग करना उनके इसी विचार को दर्शाता है कि पद मिलने से व्यक्ति का काम और जमीन से जुड़ाव नहीं बदलना चाहिए।
ईश्वर सेन किसान संघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। अब ग्रामीणों को उनसे पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने, आमजन की समस्याओं का समाधान कराने और जरूरतमंदों की मदद जारी रखने की उम्मीद है।
सरपंच की कुर्सी मिली, लेकिन हाथों में आज भी वही कैंची। ईश्वर सेन की कहानी इस बात का संदेश देती है कि जनसेवा के लिए किसी बड़े पद या दिखावे की नहीं, बल्कि लोगों के बीच रहने और उनकी जरूरत के समय काम आने की भावना की आवश्यकता होती है।