काली पट्टी बांधकर तहसील से निकाला जुलूस, एसडीएम के माध्यम से कलक्टर को सौंपा ज्ञापन; भयमुक्त कार्य वातावरण समेत कई मांगें उठाईं
अलकेश पारीक
जहाजपुर, स्मार्ट हलचल। राजस्थान पटवार-कानूनगो संघ, जिला भीलवाड़ा के आह्वान पर सोमवार को जहाजपुर में पटवारियों और गिरदावरों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर तहसील कार्यालय से एसडीएम कार्यालय तक जुलूस निकाला और उपखंड अधिकारी के माध्यम से जिला कलक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ ने चेतावनी दी कि यदि 29 जुलाई 2026 तक उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 30 जुलाई से जिलेभर में पूर्ण कलमबंद हड़ताल (कार्य बहिष्कार) शुरू कर दी जाएगी।
संघ ने ज्ञापन में कहा कि राजस्व कर्मचारियों पर लगातार अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे भय का वातावरण बन गया है। विभागीय जांचों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी कर कठोर कार्रवाई की जा रही है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों ने भयमुक्त कार्य वातावरण उपलब्ध कराने तथा लंबित विभागीय जांचों का निष्पक्ष एवं नियमानुसार निस्तारण कराने की मांग उठाई।
ज्ञापन में पटवारी हरदेव लाल बैरवा के विरुद्ध की गई कार्रवाई की पुनः समीक्षा कर प्रकरण को राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के तहत सक्षम स्तर पर भेजने की मांग की गई। इसके अलावा अन्य जिलों से स्थानांतरित होकर भीलवाड़ा आए कर्मचारियों को शीघ्र कार्यमुक्त करने तथा वर्तमान में निलंबित सभी पटवारियों और गिरदावरों को तत्काल बहाल करने की मांग भी रखी गई।
संघ ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा तक मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 30 जुलाई से जिलेभर में राजस्व कार्य पूरी तरह ठप हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली सभी परिस्थितियों की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
हड़ताल हुई तो ये काम होंगे प्रभावित
नामांतरण और विरासत दर्ज करने के कार्य रुक जाएंगे।
सीमांकन और पैमाइश के मामलों में देरी होगी।
जमाबंदी, नक्शा, फर्द सहित अन्य राजस्व अभिलेख जारी नहीं हो सकेंगे।
राजस्व न्यायालयों एवं प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ेगा।
किसानों और आमजन के भूमि संबंधी कार्य लंबित हो सकते हैं।
संघ की प्रमुख मांगें
राजस्व कर्मचारियों के लिए भयमुक्त कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
लंबित विभागीय जांचों का निष्पक्ष एवं नियमसम्मत निस्तारण किया जाए।
निलंबित पटवारियों एवं गिरदावरों को तत्काल बहाल किया जाए।
अन्य जिलों से स्थानांतरित कर्मचारियों को शीघ्र कार्यमुक्त किया जाए।
पटवारी हरदेव लाल बैरवा के प्रकरण की नियमानुसार पुनः समीक्षा की जाए।
