मंडफिया में आस्था का सौदा? प्राकृतिक नालों पर अतिक्रमण और प्रशासनिक भूमिका पर उठे सवाल
ग्राउंड रिपोर्ट #2: ऐतिहासिक तालाब, प्राकृतिक जलमार्ग, मंदिर मंडल के निर्माण और मेले के खर्च को लेकर जांच की मांग; दस्तावेजों के आधार पर जवाबदेही तय करने की जरूरत
मंडफिया (चित्तौड़गढ़) | रिपोर्ट: आकाश शर्मा
मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलियाजी की नगरी मंडफिया में प्राकृतिक जलमार्गों, पुराने तालाब के अस्तित्व और निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों के दावों के अनुसार, क्षेत्र में प्राकृतिक नाले के मूल स्वरूप, जलप्रवाह और आसपास हुए निर्माणों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। आरोप यह भी हैं कि कुछ प्रभावशाली लोगों के हितों के चलते जलमार्ग के आसपास निर्माण हुए, जबकि संबंधित विभागों और जिम्मेदार संस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
यह मामला केवल जमीन और निर्माण तक सीमित नहीं है। श्रद्धालुओं की सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग और धार्मिक नगरी के विकास में पारदर्शिता जैसे विषय भी इससे जुड़े हैं। हालांकि, अतिक्रमण, मिलीभगत और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

ऐतिहासिक तालाब का अस्तित्व और प्राकृतिक नाले के स्वरूप पर सवाल

मंडफिया के बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों के अनुसार, चित्तौड़गढ़ मार्ग पर कस्बे के बाहर कभी एक बड़ा तालाब हुआ करता था, जिसमें पर्याप्त पानी रहता था। बताया जाता है कि श्रद्धालु यहां स्नान कर अपनी यात्रा पूरी करते थे।

स्थानीय लोगों के दावों के अनुसार, समय के साथ तालाब और उससे जुड़े जलप्रवाह की स्थिति में बदलाव आया तथा तालाब का जलस्तर घटता गया। इस बदलाव के पीछे निर्माण कार्यों, जल निकासी व्यवस्था और एनीकट की संरचना की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर सामने आए दावों के अनुसार, प्राकृतिक नाले के पुराने मार्ग और वर्तमान स्वरूप की तुलना किए जाने की जरूरत है। आरोप है कि नाले के बहाव को सीधा करने या उसके आसपास निर्माण करने से संबंधित जमीन के उपयोग में बदलाव हुआ। इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुराने राजस्व नक्शों, रिकॉर्ड, वर्तमान स्थल निरीक्षण और संबंधित निर्माणों की स्वीकृतियों की जांच जरूरी है।

अब्दुल रहमान प्रकरण और जलस्रोतों के संरक्षण का कानूनी सवाल

प्राकृतिक नालों और जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर राजस्थान में कानूनी प्रावधानों तथा न्यायालयों के निर्देशों का महत्व है। रिपोर्ट में स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया गया है कि मंडफिया में पुराने जलमार्गों और तालाब से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड के अनुरूप संरक्षण किया गया या नहीं।

राजस्थान उच्च न्यायालय के चर्चित अब्दुल रहमान प्रकरण का उल्लेख करते हुए प्राकृतिक जलस्रोतों की भूमि और उनके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ के आरोपों की कानूनी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। किसी भूमि की कानूनी स्थिति, लागू न्यायिक निर्देशों और निर्माण की वैधता का निर्धारण संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, स्वीकृतियों और मामले के तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

प्राकृतिक नाले के किनारे निर्माण, संभावित अतिक्रमण और जलप्रवाह में बाधा की शिकायतों पर संबंधित विभागों को स्थल निरीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही यह भी जांचा जाना चाहिए कि संबंधित क्षेत्र में कौन-से निर्माण स्वीकृत हैं और किन पर नियमानुसार कार्रवाई आवश्यक है।

बड़ा सवाल: क्या पुराने राजस्व रिकॉर्ड, प्राकृतिक जलमार्ग की वास्तविक सीमा और वर्तमान निर्माणों का मिलान कर निष्पक्ष जांच की जाएगी?
मंदिर मंडल के पुराने निर्माण और जेसीबी कार्रवाई पर सवाल

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू मंदिर मंडल से जुड़े निर्माण कार्य भी हैं। स्थानीय दावों के अनुसार, लगभग दस वर्ष पहले श्रद्धालुओं की सुविधाओं और जनहित के नाम पर नाले के आसपास कंक्रीट के ढांचे बनाए गए थे। अब कुछ निर्माणों को जेसीबी मशीनों से हटाए जाने की बात सामने आई है।

यदि इन निर्माणों को वास्तव में हटाया गया है, तो यह जानना जरूरी है कि निर्माण किस स्थान पर हुए थे, उनके लिए कौन-सी स्वीकृतियां जारी की गई थीं और उन्हें हटाने का आदेश किस अधिकारी या संस्था ने दिया।

निर्माणों की लागत, स्वीकृति, उपयोगिता और उन्हें हटाने पर हुए खर्च का विवरण सार्वजनिक होने से मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। मंदिर मंडल की भूमिका से जुड़े आरोपों पर उसका आधिकारिक पक्ष भी सामने आना चाहिए।

सवाल यह है कि यदि पुराने निर्माण नियमानुसार थे, तो उन्हें हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? और यदि वे नियमों के विपरीत थे, तो निर्माण के समय जिम्मेदारी किसकी थी?
टेंडर, राजनीतिक प्रभाव और मेले के बजट की जांच की मांग

स्थानीय सूत्रों के हवाले से मंदिर क्षेत्र में निर्माण कार्यों, टेंडर प्रक्रिया और राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या समूह की संलिप्तता साबित करने के लिए दस्तावेजी साक्ष्य और संबंधित पक्षों का जवाब आवश्यक है।
रिपोर्ट में हाल ही में आयोजित तीन दिवसीय मेले के खर्च को लेकर भी दावा किया गया है। बताया गया कि पत्रकारों को आधिकारिक खर्च लगभग 2.5 करोड़ रुपये बताया गया था। वहीं, कुछ स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस बार रोशनी और सजावट पर लगभग 90 लाख रुपये खर्च बताए गए, जबकि पूर्व में इसी प्रकार के काम पर करीब 20 लाख रुपये खर्च होने की बात कही जाती थी।
इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए स्वीकृत बजट, निविदा दस्तावेज, कार्यादेश, भुगतान विवरण, बिल-वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्रों की जांच आवश्यक है। अलग-अलग वर्षों के खर्च की तुलना करते समय कार्यों के दायरे, सजावट की मात्रा, दरों और अन्य परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा।
मुख्य सवाल: मेले की रोशनी, सजावट और अन्य व्यवस्थाओं पर वास्तविक खर्च कितना हुआ? क्या सभी भुगतान और टेंडर प्रक्रिया का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा?
भूमि और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच जरूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राकृतिक नाले, आसपास की जमीन और निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेज सामने लाने की तैयारी की जा रही है। यदि संबंधित दस्तावेज उपलब्ध होते हैं, तो उनके आधार पर भूमि की स्थिति, निर्माण की वैधता और जिम्मेदार संस्थाओं की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है।
मंडफिया और आसपास विकसित हो रही कॉलोनियों में भी भूमि उपयोग, निर्माण स्वीकृति और जल निकासी व्यवस्था से जुड़े मामलों की नियमानुसार जांच की मांग उठाई जा सकती है। किसी भी व्यक्ति, परिवार या राजनीतिक प्रतिनिधि के खिलाफ आरोपों को तथ्य मानने से पहले उनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्ष का जवाब आवश्यक है।
प्राकृतिक जलमार्गों के संरक्षण के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सार्वजनिक धन के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करना संबंधित संस्थाओं और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
प्रशासन से अपेक्षित जवाब
- पुराने तालाब और प्राकृतिक नाले के राजस्व रिकॉर्ड तथा वर्तमान स्थिति की जांच।
- नाले के आसपास बने निर्माणों की स्वीकृतियों और संभावित अतिक्रमण का स्थल निरीक्षण।
- मंदिर मंडल के पुराने निर्माणों तथा उन्हें हटाने के आदेश और कारणों का विवरण।
- मेले की सजावट, रोशनी और अन्य व्यवस्थाओं के बजट, टेंडर तथा भुगतान की जांच।
- संबंधित विभागों, मंदिर मंडल और आरोपों में उल्लेखित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक करना।
अगली रिपोर्ट में दस्तावेजों के आधार पर पड़ताल
मंडफिया में प्राकृतिक जलमार्गों, पुराने निर्माणों और सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़े सवालों का जवाब दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा। इस मामले में निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और संबंधित सभी पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है। आगे की रिपोर्ट में उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के आधार पर तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
ग्राउंड रिपोर्ट #2 | आकाश शर्मा
स्मार्ट हलचल | चित्तौड़गढ़, राजस्थान