गेणोली में सुहागिनों ने श्रद्धा व उल्लास से मनाया करवा चौथ का पावन पर्व: देवालयों में सामूहिक पूजन कर सुनी व्रत कथा, चंद्रमा को अर्घ्य देकर की अखंड सौभाग्य की कामना

दिनभर रखा निर्जला व्रत, शाम को सोलह शृंगार कर मंदिरों में जुटीं सुहागिन महिलाएं; छलनी से चंद्र दर्शन कर पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की मांगी दुआ

गेणोली/मांडलगढ़ (स्मार्ट हलचल)क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम गेणोली में करवा चौथ का पावन पर्व सुहागिनों द्वारा पूर्ण श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक आस्था के साथ मनाया गया। अखंड सौभाग्य एवं पति की दीर्घायु की कामना को लेकर महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा। शाम के समय सुहागिनों ने सामूहिक रूप से स्थानीय देवालयों में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और चंद्र दर्शन के उपरांत अर्घ्य अर्पित कर व्रत पूर्ण किया।

देवालयों में गूंजे मंगल गीत, सुनी करवा चौथ की कथा

शाम होते ही सुहागिन महिलाएं सोलह शृंगार कर पूजा की थाली सजाए देवालयों में पहुंचीं। मंदिरों में महिलाओं ने एक साथ बैठकर चौथ माता एवं शिव परिवार की पूजा की। इसके पश्चात महिलाओं ने सामूहिक रूप से करवा चौथ की पौराणिक कथा सुनी तथा एक-दूसरे को करवा फेरने की रस्म निभाई। देवालयों में मंगल गीतों के गायन से संपूर्ण परिवेश धार्मिक उल्लास से भर गया।

🛑 गेणोली करवा चौथ पर्व : मुख्य बिंदु

  • स्थल: ग्राम गेणोली, उपखंड मांडलगढ़ (भीलवाड़ा)।
  • अनुष्ठान: दिनभर निर्जला उपवास व देवालयों में सामूहिक पूजा-अर्चना।
  • परंपरा: करवा चौथ व्रत कथा श्रवण एवं करवा आदान-प्रदान की रस्म।
  • पूर्णाहुति: चंद्र दर्शन कर अर्घ्य समर्पित किया तथा पति के हाथों जल पीकर खोला व्रत।

चंद्र दर्शन के बाद दिया अर्घ्य, पति के हाथों ग्रहण किया जल

देर शाम आकाश में चंद्रमा के दर्शन होते ही सुहागिनों ने छलनी से चंद्रदेव का दीदार किया और विधिपूर्वक अर्घ्य देकर अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना की। इसके बाद पति का चेहरा देखकर चरण स्पर्श किए और पति के हाथों जल ग्रहण कर निर्जला व्रत खोला। पर्व को लेकर नवविवाहिताओं सहित सभी महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिला।