मेवाड़ का हरिद्वार ‘मातृकुंडिया’ कनेक्टिविटी में बदहाल: रोडवेज बसें बंद होने से श्रद्धालु और पर्यटक परेशान पुनः शुरू करने की मांग
बद्री लाल माली
गुरला, स्मार्ट हलचल। चित्तौड़गढ़/आरणी।मेवाड़ के हरिद्वार के नाम से विख्यात प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मातृकुंडिया इन दिनों प्रशासन की अनदेखी का शिकार है। हिंदू आस्था के इस बड़े केंद्र और राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में शुमार 52 गेटों वाले मातृकुंडिया बांध तक पहुँचने के लिए रोडवेज बसों की कनेक्टिविटी पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में भारी रोष है।
*पूर्व में संचालित बसें हुईं बंद*
स्थानीय निवासी पंकज सेन (आरणी) ने बताया कि पूर्व में इस मार्ग पर रोडवेज की महत्वपूर्ण बसें संचालित थीं। आरणी से उदयपुर और चित्तौड़गढ़ से पाली वाया मातृकुंडिया होकर चलने वाली रोडवेज बसें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इन बसों के बंद होने से न केवल आम जनता को आवागमन में परेशानी हो रही है, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को भी निजी वाहनों या महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है।
पर्यटन और आस्था पर पड़ रहा असर
मातृकुंडिया न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। बांध के 52 गेटों का नजारा देखने बड़ी संख्या में लोग यहाँ आते हैं। परिवहन के उचित साधन न होने के कारण यहाँ पर्यटन व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन और प्रशासन इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हैं।
*प्रशासन से पुनः बस सेवा शुरू करने की मांग*
क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं ने मांग की है कि मातृकुंडिया के धार्मिक और पर्यटन महत्व को देखते हुए बंद की गई रोडवेज सेवाओं को तुरंत बहाल किया जाए। आरणी निवासी पंकज सेन सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रोडवेज कनेक्टिविटी में सुधार नहीं हुआ, तो वे अपनी मांग को लेकर उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे।
