जहाजपुर बंद का मिला-जुला असर, अस्पताल के मुद्दे पर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

नई जगह उप जिला अस्पताल बनाने के विरोध में वरिष्ठ नागरिक मंच का आह्वान; कई दुकानें खुली रहीं, मुस्लिम समाज से जुड़े कई व्यापारियों ने भी बंद में नहीं लिया हिस्सा

अलकेश पारीक

 

जहाजपुर।स्मार्ट हलचल|उप जिला अस्पताल के नए भवन को वर्तमान अस्पताल परिसर से अलग नई जगह बनाए जाने के विरोध में मंगलवार को वरिष्ठ नागरिक मंच के आह्वान पर जहाजपुर बंद रखा गया। हालांकि बंद का शहर के बाजार में मिला-जुला असर देखने को मिला। कई व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर समर्थन किया, जबकि बड़ी संख्या में दुकानें सामान्य रूप से खुली रहीं और बाजार में व्यापारिक गतिविधियां जारी रहीं।

बंद के दौरान मुस्लिम समाज से जुड़े कई व्यापारियों की दुकानें भी खुली रहीं। उनके प्रतिष्ठानों पर सामान्य रूप से कारोबार होता रहा और उन्होंने बंद में हिस्सा नहीं लिया। इससे यह स्पष्ट रहा कि अस्पताल के मुद्दे पर बंद को लेकर व्यापारियों के बीच एकराय नहीं रही।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

अस्पताल के निर्माण स्थल को लेकर चल रहे विवाद के बीच वरिष्ठ नागरिक मंच और अस्पताल संघर्ष समिति से जुड़े लोग मंगलवार दोपहर उपखंड कार्यालय पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में उप जिला अस्पताल का नया भवन वर्तमान अस्पताल परिसर में ही बनाए जाने की मांग रखी गई। साथ ही अस्पताल में रिक्त पदों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति करने और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।

ज्ञापन से पहले नगर में माइक से ऐलान कर लोगों से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की गई थी। इसके बाद लोग उपखंड कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।

विधायक की प्रेस वार्ता के बाद अब राजनीतिक चर्चा भी तेज

उप जिला अस्पताल के मुद्दे को लेकर पिछले कई दिनों से जहाजपुर में माहौल गरमाया हुआ है। कुछ दिन पहले विधायक गोपीचंद मीणा ने प्रेस वार्ता कर अस्पताल को लेकर अपना पक्ष रखा था। विधायक की ओर से क्षेत्र में कांग्रेस के राजनीतिक रूप से खत्म हो जाने की बात भी कही गई थी।

अब अस्पताल के निर्माण स्थल के विरोध में सामने आए आंदोलन के बाद विधायक के उस बयान की भी स्थानीय स्तर पर चर्चा होने लगी है। लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि यदि क्षेत्र में कांग्रेस खत्म हो चुकी है तो अस्पताल के मुद्दे पर विरोध की आवाजें किस राजनीतिक खेमे से आ रही हैं?

‘अगर कांग्रेस खत्म हो गई तो विरोध कौन कर रहा?’

अस्पताल विवाद अब सिर्फ निर्माण स्थल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ राजनीतिक चर्चाएं भी जुड़ती जा रही हैं। शहर में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोग इसे जनहित से जुड़ा आंदोलन बता रहे हैं तो कुछ लोग इसके राजनीतिक पहलुओं पर भी चर्चा कर रहे हैं।

सोशल और राजनीतिक चर्चाओं में एक सवाल खास तौर पर सामने आ रहा है—“जब कांग्रेस खत्म हो चुकी है, जैसा विधायक ने कहा था, तो फिर अस्पताल के मुद्दे पर विरोध कौन कर रहा है? क्या यह विरोध बीजेपी के भीतर से ही उठ रहा है?”

हालांकि यह स्थानीय लोगों के बीच चल रही चर्चा और सवाल हैं। किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक दावा सामने नहीं आया है।

बाजार में अलग-अलग राय, आंदोलन के अगले कदम पर नजर

मंगलवार को बंद के दौरान शहर में अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली। कुछ दुकानदारों ने अस्पताल के मुद्दे को समर्थन देते हुए प्रतिष्ठान बंद रखे, जबकि कई व्यापारियों ने दुकानें खोलकर सामान्य कारोबार किया। मुस्लिम समाज से जुड़े कई व्यापारियों के प्रतिष्ठान भी खुले रहे।

ऐसे में जहाजपुर बंद पूरी तरह सफल नहीं रहा और इसका असर मिला-जुला रहा। अब ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अस्पताल संघर्ष समिति और वरिष्ठ नागरिक मंच की ओर से आगे क्या रणनीति अपनाई जाती है, इस पर शहरवासियों की नजर बनी हुई है।

फिलहाल उप जिला अस्पताल के निर्माण स्थल को लेकर चल रहा विवाद जहाजपुर में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार की ओर से इस मुद्दे पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखने वाली बात होगी।