POCSO में एफआईआर दर्ज
भीलवाड़ा
स्मार्ट हलचल|शहर के 100 फीट रोड स्थित एक मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी के कार्यालय में नाबालिग बालिकाओं से कथित रूप से जबरन काम करवाने, उन्हें इच्छा के विरुद्ध रोककर रखने और अनुचित स्पर्श करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस, बाल कल्याण समिति और बाल संरक्षण से जुड़े प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर छह नाबालिग बालिकाओं को रेस्क्यू किया। पुलिस की ओर से POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा के अनुसार, कुछ नाबालिग बालिकाएं अपने परिजनों के साथ पब्लिक पावर एंड अवेयरनेस सोसायटी के प्रतिनिधि गोटू सिंह मंगलपुरा के पास पहुंचीं। बालिकाओं ने कंपनी में कथित रूप से जबरन काम करवाने, इच्छा के विरुद्ध रोककर रखने और गलत नीयत से छूने सहित अन्य शिकायतें बताईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीओ की ओर से अधिवक्ता प्रियांशु सांखला और अधिवक्ता मुकेश कुमार सुथार को सूचना दी गई।
सूचना मिलने पर गांधी नगर थाना पुलिस, बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी, एनजीओ प्रतिनिधि गोटू सिंह मंगलपुरा तथा अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा, मुकेश कुमार सुथार और प्रियांशु सांखला सहित अन्य संबंधित लोग मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान कार्यालय में छह नाबालिग बालिकाएं मिलीं। इसके बाद पुलिस और बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप कर उन्हें रेस्क्यू किया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बालिकाओं के परिजनों ने पुलिस को लिखित रिपोर्ट भी दी। इनमें से चार बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जहां उनके संरक्षण, काउंसलिंग और आवश्यक देखभाल के लिए शेल्टर होम भेजने के आदेश दिए गए।
मामले में देर रात तक बालिकाओं के परिजन गांधी नगर थाने में मौजूद रहे। परिजन कंपनी और उसके संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। परिजनों का कहना था कि पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी, लेकिन देर रात तक उन्हें एफआईआर की प्रति नहीं मिली। इसको लेकर परिजनों ने नाराजगी जताई। एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराने में हुई देरी के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल संरक्षण कानूनों के तहत निष्पक्ष जांच की मांग उठी है। जांच में बालिकाओं की आयु, उनके बयान, कंपनी की भर्ती प्रक्रिया, कार्य संचालन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। बालिकाओं को आवश्यकतानुसार चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सहायता और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाना भी जरूरी है।
पब्लिक पावर एंड अवेयरनेस सोसायटी की ओर से मामले की समयबद्ध जांच, सभी बालिकाओं के संरक्षण और काउंसलिंग तथा साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही, पीड़ित पक्ष को एफआईआर की प्रति और जांच की प्रगति के संबंध में नियमानुसार जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।
मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। बालिकाओं की पहचान और निजता सुरक्षित रखते हुए निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है।