अमर चन्द बैरवा
दौसा सहित चार ताल्लुका मुख्यालयों पर लगेंगी 10 बेंचें, चेक अनादरण, बैंक रिकवरी, पारिवारिक और सिविल विवादों का होगा निस्तारण
दौसा|स्मार्ट हलचल|आमजन को त्वरित, सुलभ और कम खर्च में न्याय दिलाने तथा लंबे समय से लंबित विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने के उद्देश्य से शनिवार, 10 अक्टूबर को दौसा न्यायक्षेत्र में वर्ष की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाएगी। लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य प्रकरणों के साथ बैंकों और विभिन्न सरकारी विभागों के प्रि-लिटिगेशन मामलों का भी निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए जिले में 10 लोक अदालत बेंचों का गठन किया गया है। इन बेंचों के समक्ष कुल 12,614 प्रकरण रखे जाएंगे।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश केशव कौशिक के निर्देशानुसार दौसा मुख्यालय पर तीन तथा लालसोट, बांदीकुई, महवा और सिकराय के ताल्लुका मुख्यालयों पर सात लोक अदालत बेंचों का गठन किया गया है। इन बेंचों में न्यायिक अधिकारियों की अध्यक्षता में अधिवक्ताओं को भी शामिल किया गया है, ताकि पक्षकारों के विवादों का सहमति के आधार पर समाधान कराया जा सके।
*12,614 प्रकरण चिह्नित, राजीनामे से निस्तारण पर जोर*
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए न्यायालयों में लंबित 4,487 प्रकरण चिह्नित किए गए हैं। वहीं, न्यायालय में मुकदमा दायर होने से पूर्व समाधान के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले प्रि-लिटिगेशन स्तर के 8,127 प्रकरण भी निस्तारण के लिए रखे जाएंगे। इस प्रकार कुल 12,614 प्रकरणों को लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से सुलझाने के लिए चिह्नित किया गया है।
*चेक बाउंस, बैंक रिकवरी और पारिवारिक विवादों का होगा निस्तारण*
राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के राजीनामा योग्य मामलों की सुनवाई होगी। इनमें परक्राम्य विलेख अधिनियम की धारा 138 के तहत चेक अनादरण, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी), पारिवारिक विवाद, श्रम एवं नियोजन संबंधी मामले और भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रकरण शामिल हैं।
इसके अलावा बिजली एवं पानी के बिलों से संबंधित विवाद, राजस्व मामले, किराया, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा, क्षतिपूर्ति तथा विनिर्दिष्ट पालन से जुड़े सिविल प्रकरणों का भी निस्तारण किया जाएगा। बैंक, बीएसएनएल, विद्युत विभाग, जलदाय विभाग और नगर परिषद सहित अन्य संबंधित संस्थाओं के प्रि-लिटिगेशन मामलों को भी आपसी समझौते के आधार पर सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
*नोटिस नहीं मिलने पर भी पहुंच सकते हैं पक्षकार*
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष अग्रवाल ने बताया कि संबंधित न्यायालयों की ओर से पक्षकारों को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, जिन पक्षकारों को किसी कारणवश नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है, वे भी 10 अक्टूबर को संबंधित न्यायालय की लोक अदालत बेंच के समक्ष उपस्थित होकर अपने मामले के निस्तारण के लिए प्रयास कर सकते हैं।
जिन लोगों के राजीनामा योग्य विवाद न्यायालयों में लंबित हैं और वे आपसी सहमति से उनका समाधान चाहते हैं, वे संबंधित न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर अपने प्रकरण को राष्ट्रीय लोक अदालत में रखवा सकते हैं।
*समय और धन की बचत के साथ मिलेगा त्वरित समाधान*
सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का प्रमुख उद्देश्य विवादों को आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाना है। इसमें दोनों पक्षों की सहमति से समाधान होने के कारण अनावश्यक मुकदमेबाजी, समय और खर्च से बचा जा सकता है। लोक अदालत में समझौते के आधार पर पारित निर्णय को सिविल न्यायालय की डिक्री के समान कानूनी मान्यता प्राप्त होती है और यह संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी होता है। ऐसे निर्णय के विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता। इसके साथ ही, लोक अदालत में निस्तारित प्रकरणों में नियमानुसार कोर्ट फीस वापस लौटाने का भी प्रावधान है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आमजन से अपील की है कि वे राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाएं और अपने राजीनामा योग्य विवादों का आपसी सहमति से निस्तारण करवाकर समय, धन और श्रम की बचत करें।