जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय के बाहर लगे नोटिस से मचा बवाल, सूचना के अधिकार और जनसुनवाई पर उठे सवाल
श्रीकान्त सिंह शाक्य
लखीमपुर खीरी। स्मार्ट हलचल|जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) कार्यालय के बाहर लगा एक नोटिस इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्यालय के प्रवेश द्वार पर चस्पा सूचना में लिखा है कि “कार्यालय स्टाफ के अतिरिक्त अन्य बाहरी व्यक्तियों/कर्मचारियों का प्रवेश निषेध है।” इस नोटिस ने न केवल आम नागरिकों बल्कि सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आम लोगों का कहना है कि जिला पंचायत राज अधिकारी का कार्यालय एक सार्वजनिक सरकारी कार्यालय है, जहां ग्रामीण विकास, पंचायतों और जनहित से जुड़े मामलों में नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में यदि बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाई जाती है, तो आम जनता अपनी बात अधिकारियों तक कैसे पहुंचाएगी?
इस नोटिस को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि यदि शिकायतकर्ता, सामाजिक संगठन, पत्रकार या भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले लोग कार्यालय में प्रवेश ही नहीं कर सकेंगे, तो सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी? लोगों का कहना है कि इससे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकारी कार्यालय जनता के लिए होते हैं, न कि केवल कर्मचारियों के लिए। यदि सुरक्षा या व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कोई व्यवस्था लागू की गई है, तो उसके स्पष्ट दिशा-निर्देश सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि आम नागरिकों के अधिकार प्रभावित न हों।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह नोटिस किस विशेष परिस्थिति में लगाया गया है और इसका उद्देश्य क्या है। कई सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा कारणों से प्रवेश को नियंत्रित किया जाता है, लेकिन यदि इससे जनसुनवाई या शिकायत निवारण बाधित होता है तो संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन या जिला पंचायत राज अधिकारी इस नोटिस पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या आम नागरिकों की कार्यालय तक पहुंच और जनसुनवाई की व्यवस्था पूर्ववत सुनिश्चित की जाएगी।
