शिक्षा संबल अभियान, आरटीई भुगतान और प्री-प्राइमरी पुनर्भरण को लेकर सरकार के खिलाफ जताया विरोध
निम्बाहेड़ा, स्मार्ट हलचल। निजी विद्यालय संचालक संघ के पदाधिकारियों एवं संचालकों ने राज्य सरकार की विभिन्न नीतियों के विरोध में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव तथा माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के नाम तहसीलदार घनश्याम जरवार को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं। इस दौरान पूर्व विधायक अशोक नवलखा एवं स्थानीय सीबीओ अरविंद मुंदड़ा को भी ज्ञापन की प्रतिलिपि सौंपी गई।
ज्ञापन में निजी विद्यालय संचालकों ने आरोप लगाया कि ‘शिक्षा संबल’ अभियान के तहत निजी विद्यालयों में संयुक्त निदेशक स्तर तक के अधिकारियों द्वारा प्रतिदिन निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, जिससे विद्यालयों के नियमित प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप हो रहा है। संचालकों का कहना है कि यह व्यवस्था संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों एवं राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्थान अधिनियम, 1993 की मूल भावना के विपरीत है।
संचालकों ने यह भी कहा कि पिछले चार वर्षों से आरटीई पुनर्भरण राशि का समयबद्ध भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा न्यायालय के आदेशों के बावजूद प्री-प्राइमरी कक्षाओं का भुगतान लंबित है, जिससे निजी विद्यालयों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
निजी विद्यालय संचालक संघ ने इन मांगों के समर्थन में 15 जुलाई को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। इसके तहत बुधवार को प्रदेशभर के निजी शिक्षण संस्थान बंद रखे जाएंगे।
ज्ञापन कार्यक्रम में निम्बाहेड़ा शहर, ग्रामीण क्षेत्र, कनेरा सहित आसपास के क्षेत्रों के 60 से अधिक निजी विद्यालय संचालकों ने भाग लिया। सभी ने सरकार से लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करने तथा निजी विद्यालयों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव समाप्त करने की मांग की।
