दाने-दाने की खरीद नहीं होने से किसानों को प्रति क्विंटल ₹775 तक का नुकसान-किसान महापंचायत ने सरकारों को घेरा
शिवराज बारवाल मीना
जयपुर/टोंक।स्मार्ट हलचल|किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने राजस्थान में चना खरीद व्यवस्था को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 235 जनप्रतिनिधि होने के बावजूद किसानों के हित सुरक्षित नहीं हैं और समर्थन मूल्य पर चने की दाने-दाने की खरीद नहीं होने से किसान भारी आर्थिक घाटा सहन करने को मजबूर हैं।
रामपाल जाट ने बताया कि ‘मूल्य समर्थन योजना’ के अंतर्गत जारी मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार नेफेड एवं एनसीसीएफ को किसानों से सीधे दाने-दाने की खरीद करनी थी, लेकिन राजस्थान में इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ। इसके चलते किसानों को एक क्विंटल चने पर करीब 775 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार होने के बावजूद किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। केंद्र और राज्य में मंत्री, सांसद एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की बड़ी संख्या होने के बावजूद किसानों को राहत नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। किसान महापंचायत की ओर से सभी जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भेजकर किसानों की पीड़ा से अवगत कराया जा चुका है।
रामपाल जाट के अनुसार देश में चने के कुल उत्पादन का 78.2 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में होता है। इसके बावजूद राजस्थान में खरीद केंद्रों की स्थिति बेहद कमजोर है।मध्यप्रदेश में 3,627 खरीद केंद्र संचालित हैं, जबकि राजस्थान में केवल 773 केंद्र हैं। इनमें से 30 अप्रैल तक 261 केंद्रों पर खरीद शून्य रही, यानी वे शुरू ही नहीं हुए। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र 8 लाख 19 हजार टन से अधिक खरीद कर देश में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है, जबकि राजस्थान करीब 23 लाख टन उत्पादन होने के बावजूद डेढ़ लाख टन से कम खरीद कर पाया है, जो निर्धारित लक्ष्य का 25 प्रतिशत भी नहीं है। किसान महापंचायत ने राजस्थान की पंजीयन व्यवस्था को भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बताया। संगठन के अनुसार राजफेड में पंजीयन प्रक्रिया बेहद जटिल है और जनआधार कार्ड आधारित व्यवस्था के कारण एक परिवार में एक से अधिक खातेदार होने के बावजूद केवल एक ही सदस्य की उपज खरीदी जाती है। जबकि नेफेड एवं एनसीसीएफ में आधार कार्ड आधारित व्यवस्था होने से परिवार के सभी खातेदारों की खरीद संभव है। रामपाल जाट ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से किसान इस व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है
उन्होंने मांग की कि राजस्थान में भी नेफेड और एनसीसीएफ की तर्ज पर पारदर्शी एवं सरल खरीद व्यवस्था लागू की जाए ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
