एक खांसी से फैल सकता है खतरा,जागरूकता से जीती जा सकती है जंग…
वाराणसीस्मार्ट हलचल।टीबी हारेगा,भारत जीतेगा” के संकल्प के साथ भारतीय रेलवे ने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान को जनआंदोलन का रूप देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पूर्वोत्तर रेलवे के लहरतारा स्थित मंडल चिकित्सालय में बुधवार को कर्मचारियों के लिए भव्य टीबी जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया, जहां डॉक्टरों ने न सिर्फ बीमारी के लक्षण और बचाव बताए बल्कि लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश भी दिया।
मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. आर.जे. चौधुरी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मंडल चिकित्सालय के चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सेमिनार में मौजूद विशेषज्ञों ने टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए बताया कि समय पर जांच और नियमित इलाज से यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ मंडल चिकित्सा अधिकारी डा. बी.वी. अमरनाथ ने कहा कि टीबी केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि फेफड़ों की टीबी सबसे अधिक पाई जाती है और यह खांसी व छींक के जरिए तेजी से फैलती है। उन्होंने कहा कि डायबिटीज, एड्स या कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है।
डा.अमरनाथ ने बताया कि ट्यूबरकुलोसिस मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है—लेटेंट टीबी और सक्रिय टीबी। यदि शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दिया जाए और समय पर जांच करा ली जाए तो बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है। टीबी की पहचान के लिए टीबी स्किन टेस्ट और ब्लड टेस्ट का उपयोग किया जाता है।
उन्होंने कर्मचारियों को सलाह दी कि टीबी मरीजों को मास्क का प्रयोग करना चाहिए और खुले में थूकने से बचना चाहिए। मरीजों को थूक के लिए पॉलीथिन या बंद पात्र का उपयोग करना चाहिए ताकि संक्रमण दूसरों तक न पहुंचे। साथ ही सार्वजनिक वस्तुओं के उपयोग में भी सावधानी बरतनी चाहिए।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. आर.जे. चौधुरी ने कहा कि रेलवे अस्पतालों और हेल्थ यूनिट्स में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मुफ्त जांच और उच्च गुणवत्ता वाला इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। रेलवे कॉलोनियों, यात्रियों और संवेदनशील वर्गों पर विशेष फोकस किया जा रहा है ताकि टीबी संक्रमण को जड़ से समाप्त किया जा सके।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान भारत सरकार द्वारा 9 सितंबर 2022 को शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाना है। इसके लिए जनभागीदारी, पोषण सहायता, मुफ्त दवा और जागरूकता अभियान को सबसे बड़ा हथियार बनाया गया है।
सेमिनार में डॉक्टरों ने कर्मचारियों को संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और साफ-सफाई अपनाने के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने कहा कि खुले में थूकना न केवल अस्वच्छ आदत है बल्कि यह परिवार और समाज दोनों को गंभीर खतरे में डाल सकता है।
कार्यक्रम में अपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. आर.आर. सिंह, डा. नीरज, डा. कल्पना दूबे, डा. ए.के. सिंह, डा. ममता सिंह समेत मंडल चिकित्सालय के सभी चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी कर्मचारियों ने “टीबी मुक्त भारत” के संकल्प को साकार करने के लिए जागरूकता फैलाने और स्वच्छ आदतें अपनाने का संकल्प लिया। इस आशय की जानकारी जनसम्पर्क अधिकारी अशोक कुमार ने मीडिया को दी।
