गुरु पूजन, चरण वंदन, भजन-कीर्तन और विशाल महाप्रसादी का हुआ आयोजन, राजस्थान व मध्यप्रदेश से पहुंचे श्रद्धालु।
(किशन वैष्णव)
गुरु ही भक्त और भगवान के बीच का दिव्य सेतु हैं –पूज्य केदार महाराज
शाहपुरा@ स्मार्ट हलचल|खामोर गांव में अगूंचा रोड स्थित संत श्री 1008 रामनिवास दास महाराज की समाधि स्थल पर आयोजित आठ दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं का समाधि स्थल पर पहुंचना शुरू हो गया। दिनभर गुरु पूजन, भजन-कीर्तन, संत वंदना एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। दोपहर 12 बजे से प्रारंभ हुई विशाल महाप्रसादी में हजारों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। महाप्रसादी का क्रम रात 8 बजे तक निरंतर चलता रहा।
महोत्सव में राजस्थान के भीलवाड़ा, अजमेर, किशनगढ़, ब्यावर सहित विभिन्न जिलों तथा मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु संत रामनिवास दास महाराज की समाधि के दर्शन एवं आशीर्वाद लेने पहुंचे। पूरे परिसर में गुरु महिमा के जयकारों, भजनों और धार्मिक उल्लास से भक्तिमय वातावरण बना रहा।इस अवसर पर पूज्य पंडित केदार महाराज के भक्तों ने उनका माल्यार्पण कर साफा पहनाकर अभिनंदन किया। वैदिक परंपरा के अनुसार दूध एवं जल से चरण पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अपने प्रवचनों में पंडित केदार महाराज ने कहा कि गुरु ही भक्त और भगवान के बीच का दिव्य सेतु हैं। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य जीवन का वास्तविक कल्याण और ईश्वर की प्राप्ति संभव है।वहीं खामोर स्थित नृसिंह मंदिर में महंत छैल बिहारी दास महाराज ने अपने गुरु ब्रह्मलीन रामेश्वर दास महाराज की स्मृति में विशेष गुरु पूजन किया। इस अवसर पर खीर का भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।उल्लेखनीय है कि ग्रामीण गोपाल तेली अपने पूज्य गुरु संत श्री 1008 रामनिवास दास महाराज की पावन स्मृति में पिछले चार वर्षों से लगातार आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। इस दौरान श्रद्धालु सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का अमृतपान करते हैं। आयोजन की विशेष परंपरा यह है कि कथा के शुभारंभ और समापन, दोनों अवसरों पर हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशाल महाप्रसादी का आयोजन किया जाता है। 22 से 28 जुलाई तक आयोजित चतुर्थ श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर श्रीमद्भागवत जी का वैदिक विधि-विधान से पूजन कर श्रद्धापूर्वक प्रस्थान कराया गया। इसके बाद गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित विशेष धार्मिक कार्यक्रमों के साथ आठ दिवसीय महोत्सव का समापन हुआ।
