चूल्हा जलाए बिना नन्हे शेफ ने घोली मिठास, हुनर देख निर्णायक भी हुए प्रभावित

‘पाठशाला से पाकशाला’ प्रतियोगिता में बच्चों ने बनाई सात्विक जैन मिठाइयां, जूनियर व सीनियर वर्ग में प्रतिभाओं को मिला सम्मान

अनिल कुमार खींची

ब्यावर।स्मार्ट हलचल।बच्चों के हाथों में जब हुनर और कल्पनाशीलता का संगम हुआ तो बिना चूल्हा जलाए ही मिठास से भरी स्वादिष्ट मिठाइयां तैयार हो गईं। मौका था श्री विद्यासागर पाठशाला की ओर से आयोजित ‘पाठशाला से पाकशाला’ प्रतियोगिता का, जिसमें नन्हे प्रतिभागियों ने अपनी पाक कला, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का शानदार परिचय दिया।श्री दिगंबर जैन पंचायत के अधीन एवं श्री दिगंबर जैन युवा मंडल द्वारा संचालित पाठशाला की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में बच्चों ने बिना गैस या आग का उपयोग किए विभिन्न प्रकार की सात्विक जैन मिठाइयां बनाईं। बच्चों ने मिठाइयों की आकर्षक सजावट और शानदार प्रस्तुति से सभी का ध्यान खींचा। प्रतियोगिता जूनियर एवं सीनियर दो वर्गों में आयोजित की गई। निर्णायक की भूमिका संध्या फागीवाला एवं मिथिलेश गंगवाल ने निभाई।

जूनियर वर्ग में सना बड़जात्या ने प्रथम, नविका छाबड़ा ने द्वितीय तथा मोहंश जैन एवं धरा अजमेरा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं सीनियर वर्ग में वंशिका जैन प्रथम, झलक बड़जात्या द्वितीय तथा निहित बड़जात्या एवं मानवी गदिया तृतीय स्थान पर रहे। विजेताओं को पुरस्कृत किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।

प्रतियोगिता के सफल आयोजन में शिक्षिकाओं भारती जैन, कोपल फागीवाला, मनीषा गोधा, ज्योति बड़जात्या, पूजा जैन, सविता पाटनी, सुरेखा जैन, बबीता जैन एवं रेणुका जैन ने व्यवस्थाएं संभालीं। आयोजन में राजकुमार एवं चंदा देवी तथा यशोधर एवं अमानी पहाड़िया परिवार का विशेष सहयोग रहा।

आयोजकों ने बताया कि इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान देना, उनकी छिपी प्रतिभा को मंच प्रदान करना तथा आत्मविश्वास बढ़ाना है। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों ने साबित किया कि प्रतिभा को निखारने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि उत्साह और कल्पनाशीलता की जरूरत होती है।