तीन साल से इको पार्क की दीवार पर दिख रहा पैंथर:फिर भी नहीं जागा वन विभाग,कंजर्वेशन रिजर्व बनने के बाद भी सुरक्षा इंतजाम अधूरे

मंगरोप@मुकेश खटीक।हमीरगढ़ इको पार्क में पिछले करीब तीन वर्षों से पैंथर की लगातार मूवमेंट सामने आ रही है।कई बार हमीरगढ़-मंगरोप मार्ग से गुजरने वाले लोगों ने पैंथर को वन क्षेत्र की सुरक्षा दीवार(परकोटे)पर बैठे हुए देखा है।इसके बावजूद वन विभाग सुरक्षा परकोटे की ऊंचाई बढ़ाने और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपाय करने में गंभीरता नहीं दिखा रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।स्थानीय लोगों के अनुसार पैंथर की मौजूदगी के बावजूद वन क्षेत्र की सुरक्षा दीवार 4 फिट है जिसे कोई भी वन्यजीव आसानी से फांदकर आ सकता है ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों के समक्ष परकोटा ऊंचा करवाने की मांग रखी,लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।इससे क्षेत्र से गुजरने वाले राहगीरों और आसपास के ग्रामीणों में लगातार भय का माहौल बना रहता है।हमीरगढ़ इको पार्क को संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हुए कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया जा चुका है।इसके बावजूद यहां सुरक्षा व्यवस्था,निगरानी और बुनियादी सुविधाएं अपेक्षित स्तर पर विकसित नहीं हो सकी हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि कंजर्वेशन रिजर्व घोषित होने का उद्देश्य वन्यजीवों और आमजन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है,लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है।

कंजर्वेशन रिजर्व बनने के बाद मिलनी चाहिए ये सुविधाएं:

वन्यजीव(संरक्षण)अधिनियम,1972 के तहत किसी क्षेत्र को कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किए जाने पर उसके संरक्षण और विकास के लिए विशेष प्रावधान किए जाते हैं।इसके अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकारों से सुरक्षा,विकास और रखरखाव के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।वन्यजीव संरक्षण,शिकार रोकने के अभियान और आवश्यक आधारभूत ढांचे के विकास के लिए अलग बजट का प्रावधान होता है।क्षेत्र के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए विस्तृत मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाता है।वन सुरक्षा मजबूत करने के लिए नियमित गश्त,अतिरिक्त वनकर्मियों की तैनाती,चेक पोस्ट,आधुनिक संचार संसाधन और वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं।वन्यजीवों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जलाशय,चेक डैम,कृत्रिम वाटर हॉल और सोलर पंप आधारित जल स्रोत विकसित किए जाते हैं।स्थानीय लोगों की भागीदारी और रोजगार का भी प्रावधान
कंजर्वेशन रिजर्व के संचालन के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों,ग्रामीणों और विशेषज्ञों को शामिल कर प्रबंधन समिति गठित की जाती है।राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य की तुलना में यहां स्थानीय लोगों के पारंपरिक अधिकारों का भी संरक्षण किया जाता है।साथ ही इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं के लिए गाइड,होमस्टे और अन्य रोजगार के अवसर विकसित किए जाते हैं।

वन्यजीव संरक्षण के लिए कानूनी सुरक्षा भी मजबूत

कंजर्वेशन रिजर्व घोषित होने के बाद क्षेत्र को कानूनी संरक्षण प्राप्त होता है।बिना अनुमति पेड़ों की कटाई,अवैध खनन,शिकार और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लागू होते हैं।ऐसे क्षेत्र वन्यजीवों के सुरक्षित कॉरिडोर के रूप में भी कार्य करते हैं,जिससे पैंथर सहित अन्य वन्यजीवों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहती है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने वन विभाग से इको पार्क की सुरक्षा दीवार की ऊंचाई तत्काल बढ़ाने,नियमित गश्त बढ़ाने,सीसीटीवी कैमरे लगाने,चेतावनी बोर्ड स्थापित करने और पर्याप्त वनकर्मियों की तैनाती करने की मांग की है।उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो पैंथर की बढ़ती आवाजाही के बीच कभी भी कोई गंभीर घटना हो सकती है,जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।