70 सालों से यह पुस्तकालय बना है ‘ज्ञान का मंदिर’, संवार रहा युवाओं का भविष्य

जिला पुस्तकालय आज भी 54,000 से अधिक पुस्तकों के संग्रह के साथ विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

बूंदी : स्मार्ट हलचल|किताबों की खुशबू, पन्नों की सरसराहट और शांत वातावरण में ज्ञान अर्जित करने की परंपरा यही पहचान रही है बूंदी के राजकीय सार्वजनिक जिला पुस्तकालय की. विश्व पुस्तक दिवस (23 अप्रैल) के अवसर पर यह ऐतिहासिक पुस्तकालय अपने 70 वर्षों का गौरवशाली सफर पूरा कर चुका है. करीब 50 हजार से अधिक पुस्तकों का विशाल संग्रह अपने भीतर समेटे यह पुस्तकालय आज भी ज्ञान के साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है, लेकिन बदलते समय के साथ यहां आने वाले विद्यार्थियों की प्राथमिकताएं भी बदलती नजर आ रही हैं.

इतिहास की विरासत, ज्ञान का भंडार : मार्च 1956 में स्थापित इस पुस्तकालय का उद्घाटन 3 अक्टूबर 1956 को तत्कालीन जिला कलेक्टर राजा निरंजन सिंह द्वारा किया गया था. वर्षों के सफर में यह पुस्तकालय बूंदी के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास का साक्षी बना रहा है. वर्ष 2005 से यह सिविल लाइंस स्थित अपने नवीन भवन में संचालित हो रहा है. पुस्तकालयाध्यक्ष सत्यप्रकाश श्रीवास्तव के अनुसार इस पुस्तकालय का मुख्य उद्देश्य आमजन और विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक से अधिक ज्ञानवर्धक सामग्री उपलब्ध कराना है. यहां सदस्यता की मासिक और वार्षिक व्यवस्था है, जिससे विद्यार्थी नियमित रूप से अध्ययन कर सकें.