विशेष राजनीतिक रिपोर्ट #4 – आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़। स्मार्ट हलचल|यदि पिछले दो कार्यकाल के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें, तो चित्तौड़गढ़ जिला परिषद में सियासी समीकरण हमेशा से ही बेहद रोमांचक रहे हैं। पिछले कार्यकाल में इस प्रमुख सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपना वर्चस्व कायम रखते हुए बोर्ड बनाया था और पार्टी के कद्दावर नेता गब्बर सिंह अहीर ने जिला प्रमुख की कमान संभाली थी। वहीं, उससे पिछले टर्म में भी भगवा दल का ही दबदबा देखने को मिला था। हालांकि, बीच के कुछ राजनीतिक उठापटक और उप-चुनावी दौर को छोड़ दें, तो इस कुरुक्षेत्र में ज्यादातर समय भाजपा का ही परचम लहराता रहा है। इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प हो चुका है क्योंकि सत्ता की चाबी पाने के लिए दोनों ही प्रमुख दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। दूसरी तरफ, हालिया निकाय चुनावों में मिली शिकस्त के बाद कांग्रेस बेहद सतर्क नजर आ रही है। पार्टी हर संभव राजनीतिक व सामाजिक समीकरण का गहन विश्लेषण करने के बाद ही उम्मीदवारों के नाम तय करने का मन बना चुकी है। उल्लेखनीय है कि चित्तौड़गढ़ विधानसभा के इतिहास में कांग्रेस को मुख्य बढ़त हमेशा ग्रामीण क्षेत्रों से ही मिलती आई है, जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि पार्टी विधानसभा क्षेत्र में मजबूत स्थिति में खड़ी है ।
चित्तौड़गढ़ के सियासी गलियारों में इन दिनों बस एक ही सवाल गूंज रहा है कि बाजी किसके हाथ लगेगी? हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों में जहां प्रत्याशियों को प्रचार और रणनीति के लिए बेहद कम समय मिला था, वहीं इसके ठीक विपरीत पंचायत चुनाव के लिए मिला अच्छा-खासा वक्त इस बार की राजनीतिक बिसात को बेहद दिलचस्प बना चुका है। ऐन त्योहारों के इस माहौल में जहां हर प्रत्याशी अपनी गोटियां बैठाने और वोटों की फसल काटने में दिन-रात एक किए हुए है, वहीं जिला प्रमुख का पद ‘सामान्य महिला’ वर्ग के लिए आरक्षित होने से समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं ।राजनीतिक दलों के भीतर टिकटों को लेकर अंदरूनी घमासान छिड़ गया है, जिसने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। दिग्गजों द्वारा अपने घर-परिवार की महिलाओं को चुनावी समर में उतारने की होड़ मची है ।
वार्ड नंबर 17 के अंतर्गत कुल 9 प्रमुख ग्राम पंचायतें जिसमें चिकसी, देवरी, सामरी, अरनियापंथ, जालमपुरा, शंभूपुरा, सावा, सिंदवड़ी और सहनवा आती हैं। सूत्रों के अनुसार, इस वार्ड में चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प,और आक्रामक होता दिख रहा है। यहाँ भाजपा की ओर से पूर्व जिलाध्यक्ष मिठूलाल जाट, विद्या देवी अग्रवाल और कांग्रेस खेमे से पिंटू जाट जैसे मजबूत चेहरों की चर्चा जोरों पर है। सूत्रों की मानें तो महिला वर्ग के बीच मुकाबला बेहद जोरदार होगा। जिला प्रमुख का पद ‘सामान्य महिला’ के लिए आरक्षित होने के कारण, इस दौर में दोनों ही दलों के अंतिम टिकट वितरण पर सबकी नजरें टिकी हैं कि पार्टी किस पर दांव खेलती है और कौन बाजी मारता है । जाति-पाति और हवा-हवाई दावों से परे, हमारी टीम ने धरातल पर उतरकर चुनावी सफर का आगाज कर दिया है। जिला परिषद से लेकर हर पंचायत के कुरुक्षेत्र की पल-पल की बेबाक और सटीक रिपोर्ट अब सीधे आप तक पहुँचेगी। किसमें कितना दम है ? कौन किस पर भारी पड़ेगा ? किसकी राजनीति हमेशा के लिए खत्म होगी ? और किस पार्टी का प्रत्याशी कमजोर साबित हो रहा है ? इसका असली आईना अब जनता के सामने होगा । मुद्दा आपका, प्रत्याशी आपका और जुबान भी आपकी ! धरातल की हर एक सुगबुगाहट, भीतरघात और जीत-हार के असली गणित को जानने के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ… बहुत जल्द हमारी टीम पहुँच रही है आपकी अपनी ग्राम पंचायत में !