समय जो गुजर चुका है पुनः लौटकर नही आता है : साध्वी श्री प्रतिभा श्री जी

ओम जैन

शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़ शहर के उपनगरीय क्षेत्र सेन्थी स्थित शांति भवन मे चातुर्मासिक प्रवचन की श्रृंखला में रविवार को जैन सिद्धान्ताचार्य साध्वी श्री प्रतिभा श्री म.सा. ने समय जो गुजर चुका है पुनः लौटकर नही आता है स्वयं जागो एवं दूसरो को जगाकर धर्म दलाली करो। जीवन एक अनमोल नीधी है उसका पूरा सदुपयोग धर्म आराधना मे करो जिस से आत्मा का कल्याण होगा। पर प्रवचन देते हुए उपस्थित सैकड़ो श्रावक श्राविकाओं को लाभान्वित किया।
प्रेरणा श्री जी म.सा. ने अपने प्रवचन में फरमाया कि समय बहुत तीव्र गति से बढ़ रहा है आपको अच्छे कर्मो द्वारा अपने जीवन को संवारना है समय गुजरने पर पछतावा ही शेष रहेगा। लाइट आने के पूर्व दिपक जलाया जाता था किन्तु दिपक तले हमेशा अन्धेरा ही रहता है। आज दिपक का स्थान बल्ब, बल्ब का स्थान ट्यूब लाइट एवं एल ई डी ने ले लिया है किन्तु हम एक ही जगह दिपक की तरह खड़े है। अर्थात् दिपक तले अंधेरा। आप अपना स्वयं का परिचय दे रहे हो आत्मा का साक्षात्कार नही करवा रहे हो। आत्मा का साक्षात्कार करवाइए। महत्व दीपक का नही अपितु बाति का है वैसे मनुष्य जीवन मे महत्व शरीर का नही अपितु आत्मा का है। आत्मकल्याण हेतु आध्यात्मिकता के रंग मे रंग जाइए। आत्मा को जानने वाला सबको जान लेता है। आत्मा का जानना जरूरी है। पैसो का नहीं आत्मा का हिसाब रखिए।
साध्वी श्री प्रेक्षा श्री जी ने फरमाया की जीनवाणी द्वारा ही आत्मकल्याण सम्भव है। यह चार शब्द आप हमेशा बोलते है – कुछ ‘ कुछ कुछ ‘ बहुत कुछ ‘ व सब कुछ । हम प्रायः कहते है कुछ मीलता है ‘ कुछ कुछ मिलता है ‘ बहुत कुछ मिलता है किन्तु सब कुछ नही मिलता है। संसार मे रहकर कुछ पुरुषार्थ करे तो कुछ मिलता है। सब कुछ कभी नही मिलता है। इस धरा मे ऐसा कोई नही है जिसके पास सब कुछ हो। सब कुछ प्राप्त करने के लिए हिम्मत व हौंसला चाहिए।
प्रवचन में स्थानीय सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे, बाहर से आये महमानों का श्रीसंघ सेन्थी में अभिनन्दन किया।