पुनित चपलोत
भीलवाड़ा। स्मार्ट हलचल|भीमगंज थाना क्षेत्र स्थित पांडिया अस्पताल में इलाज के दौरान 10 माह के मासूम की मौत के बाद गुरुवार को परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर हंगामा कर दिया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने और गलत ब्लड चढ़ाने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की। हंगामे की सूचना पर भीमगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश के बाद मामला शांत कराया।
परिजनों के अनुसार 10 माह के बालक देवांश भाट पिता अंकित भाट निवासी पुरानी आबादी मांडलगढ़ को 4 सितंबर को बुखार की शिकायत पर पांडिया अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया। इस दौरान अस्पताल की ओर से बच्चे में खून की कमी बताई गई, जिसके बाद परिजनों ने ब्लड की व्यवस्था करवाई।
बच्चे के नाना मोहनलाल ने आरोप लगाया कि ब्लड चढ़ाने के बाद देवांश की हालत बिगड़ने लगी। वह लगातार रोने लगा और उसके शरीर में सूजन आने लगी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार डॉक्टर को बुलाने का प्रयास किया, लेकिन समय पर बच्चे को नहीं देखा गया। हालत बिगड़ने पर 6 सितंबर को बच्चे को भीलवाड़ा के निजी अस्पताल में ले जाया गया,उसके बाद उसकी हालत में सुधार नहीं होने कर उसे अहमदाबाद ले जाया गया।
परिजनों का दावा है कि अहमदाबाद में जांच के दौरान उन्हें गलत ब्लड चढ़ाए जाने से बच्चे के अंगों को नुकसान पहुंचने की बात बताई गई। इसके बाद देवांश का अहमदाबाद में इलाज चलता रहा, लेकिन 16 सितंबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद परिजन गुरुवार को पांडिया अस्पताल पहुंचे और विरोध जताते हुए कार्रवाई की मांग की।
*अस्पताल प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार*
वहीं, पांडिया अस्पताल के डॉक्टर अमृतलाल पांडिया ने परिजनों के आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि बालक को निमोनिया की गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था। बच्चे की हालत गंभीर होने के कारण ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ी थी। अस्पताल के अनुसार ब्लड चढ़ाने से पहले ब्लड ग्रुप और ब्लड नंबर का मिलान किया गया था और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही ब्लड चढ़ाया गया।
डॉक्टर ने कहा कि बच्चे की हालत निमोनिया के कारण गंभीर थी। बाद में परिजन उसे अस्पताल से ले गए, जहां आगे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही से इनकार किया है।