14 सितंबर को घर-घर विराजेंगे विघ्नहर्ता, बाजारों में सजीं गणेश प्रतिमाएं; 11:13 से 1:29 बजे तक स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त
भीलवाड़ा (महेन्द्र नागौरी)
स्मार्ट हलचल|वस्त्र नगरी भीलवाड़ा अब गणेशमय होने को तैयार है। शहर के बाजारों में गणपति की प्रतिमाएं सज चुकी हैं। कहीं बप्पा के बाल स्वरूप ने लोगों का मन मोह लिया है तो कहीं भव्य प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। घरों में पूजा स्थल सजने लगे हैं और सार्वजनिक गणेशोत्सव समितियां पंडालों को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं।
14 सितंबर सोमवार को गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता घर-घर विराजेंगे। इसके साथ ही वस्त्र नगरी में 12 दिन तक भक्ति और उत्सव का रंग छाएगा। सुबह-शाम आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों के साथ शहर की गलियों में ‘गणपति बप्पा मोरया… मंगल मूर्ति मोरया’ के जयकारे गूंजेंगे। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ गणेशोत्सव का समापन होगा।
बाजारों में बप्पा की रौनक, सजावट सामग्री की बढ़ी मांग
गणेश चतुर्थी करीब आते ही वस्त्र नगरी के बाजारों में भी उत्सव का रंग चढ़ने लगा है। गणेश प्रतिमाओं के साथ पूजा सामग्री, फूल-माला, दूर्वा, मोदक, रंगोली, लाइटिंग और पंडाल सजावट के सामान की खरीदारी बढ़ रही है।
घर में स्थापना करने वाले परिवार अपनी पसंद की प्रतिमाएं खरीद रहे हैं। वहीं मोहल्लों और कॉलोनियों में युवाओं की टोलियां सार्वजनिक गणेश स्थापना की तैयारियों में जुटी हैं। वस्त्रों के कारोबार के लिए देशभर में पहचान रखने वाला भीलवाड़ा अब गणेशोत्सव की धार्मिक रौनक के लिए भी सजने लगा है।
घर-घर सजेगा बप्पा का दरबार
गणपति स्थापना को लेकर घरों में विशेष तैयारियां चल रही हैं। पूजा स्थल की सफाई से लेकर रंगोली, फूलों और रोशनी से सजावट की जा रही है। बच्चों में बप्पा को घर लाने का उत्साह देखते ही बन रहा है।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश विघ्नों का नाश करने वाले और शुभता के देवता हैं। इसलिए गणेश चतुर्थी पर विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है।
12 दिन… भक्ति में रंगेगी वस्त्र नगरी
गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक भीलवाड़ा में धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी। मंदिरों और पंडालों में आरती, भजन-कीर्तन और विशेष धार्मिक अनुष्ठान होंगे। घरों में भी सुबह-शाम गणपति आराधना का दौर चलेगा।
श्रद्धालु भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करेंगे। गणेश चालीसा, गणेश सहस्रनामावली, गणपति अथर्वशीर्ष और ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र जाप के माध्यम से आराधना की जाएगी।
पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त
पंचांग गणना के अनुसार 14 सितंबर को सुबह 7:07 बजे तक तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी, जो 15 सितंबर मंगलवार सुबह 7:45 बजे तक रहेगी।
भगवान गणेश का प्राकट्य मध्याह्न काल में माना गया है। इसी कारण 14 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी।
गणपति स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:29 बजे तक रहेगा।
चौघड़िया के अनुसार शुभ, लाभ और अमृत वेला में भी पूजन को श्रेष्ठ माना गया है।
एक पखवाड़ा… पर्वों की लगातार दस्तक
सितंबर का यह पक्ष धार्मिक आयोजनों से भरा रहेगा। 13 सितंबर को बलराम जयंती, वराह जयंती और हरितालिका तीज, 14 को गणेश चतुर्थी और 15 को ऋषि पंचमी व जैन समाज का क्षमापना दिवस रहेगा।
16 सितंबर को दिगम्बर जैन समाज का पर्युषण पर्व, 17 को विश्वकर्मा जयंती, 18 को महालक्ष्मी व्रत का शुभारंभ, 19 को दधीचि जयंती व राधाष्टमी और 20 को श्रीचंद्र नवमी व अदुःख नवमी मनाई जाएगी।
इसके बाद 21 को तेजा दशमी, 22 को जलझूलनी एकादशी, 23 को वामन जयंती, 24 को हस्ति मुनि मेवाड़ी की पुण्यतिथि और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी होगी। 26 सितंबर से पितृपक्ष शुरू होगा।
वस्त्र नगरी में अब गूंजेगा एक ही जयघोष…
भीलवाड़ा की पहचान भले ही देश-दुनिया में वस्त्र नगरी के रूप में हो, लेकिन पर्व-त्योहार आते ही यह शहर अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक रंगत में भी नजर आता है। गणेशोत्सव के साथ एक बार फिर शहर की गलियां सजेंगी, घरों में दीप जलेंगे और पंडालों में भक्ति की महफिलें सजेंगी।
अब इंतजार सिर्फ उस शुभ घड़ी का है, जब बप्पा के आगमन के साथ वस्त्र नगरी के हर कोने से एक ही स्वर उठेगा—
“गणपति बप्पा मोरया… मंगल मूर्ति मोरया…”
14 सितंबर से वस्त्र नगरी 12 दिन तक भक्ति, आस्था और उत्सव के रंग में रंगी नजर आएगी।