सेलिब्रिटी के आने से पहले ही काट दिए बड़े-बड़े पेड़, अपने प्रमोशन के लिए हरियाली की बलि क्यों?

ब्रांडेड फैक्ट्री के सामने पेड़ों की कटाई से उठे सवाल, पर्यावरण संरक्षण के दावों के बीच हरियाली पर चली आरी; फैक्ट्री मालिक ने विद्युत विभाग पर डाली जिम्मेदारी

भीलवाड़ा|स्मार्ट हलचल|एक ओर पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिकाधिक पौधे लगाने और हरियाली बढ़ाने की अपील की जाती है, वहीं दूसरी ओर शहर में बड़े-बड़े पेड़ों की कटाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। चित्तौड़ गढ़ रोड़ स्थित एक ब्रांडेड फैक्ट्री के सामने लगे विशाल पेड़ों को काटे जाने के बाद यह सवाल चर्चा में है कि आखिर इन पेड़ों को काटने की जरूरत क्यों पड़ी? खास बात यह है कि फैक्ट्री में सेलिब्रिटी के आने से पहले ही पेड़ों की कटाई किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में चर्चा है कि क्या फैक्ट्री के प्रचार-प्रसार और आयोजन की तैयारियों के बीच पेड़ों की बलि चढ़ा दी गई?
फैक्ट्री के सामने वर्षों से खड़े बड़े-बड़े पेड़ न केवल हरियाली बढ़ाते थे, बल्कि राहगीरों और आसपास के क्षेत्र को छाया भी प्रदान करते थे। ऐसे पेड़ों को काटे जाने से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और विकास के नाम पर लिए जाने वाले फैसलों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर जिन पेड़ों को बड़ा होने में वर्षों लगते हैं, उन्हें कुछ ही समय में काट देने का निर्णय किस आधार पर लिया गया? क्या पेड़ों को बचाने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं था? यदि किसी तकनीकी या अन्य कारण से पेड़ों को हटाना जरूरी था, तो क्या उन्हें सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया गया?
मामले में फैक्ट्री मालिक की ओर से पेड़ों की कटाई के लिए विद्युत विभाग की कार्रवाई का हवाला दिया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पेड़ों को काटने का वास्तविक कारण क्या था, कटाई किसके निर्देश पर की गई और इसके लिए संबंधित विभाग से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि विद्युत लाइनों की सुरक्षा या किसी तकनीकी बाधा के कारण पेड़ों की कटाई की गई, तो इसकी आधिकारिक पुष्टि और संबंधित रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। वहीं, यदि पेड़ों को काटने के पीछे कोई अन्य कारण था, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सेलिब्रिटी के आगमन से पहले हुई इस कटाई ने एक और सवाल खड़ा कर दिया है। क्या किसी आयोजन की भव्यता, प्रतिष्ठा या प्रचार-प्रसार के मुकाबले पर्यावरण का महत्व कम हो गया है? किसी ब्रांड की पहचान उसके उत्पादों, गुणवत्ता और कार्यशैली से बनती है, लेकिन यदि उसी ब्रांड के सामने हरियाली उजाड़े जाने की तस्वीर सामने आए, तो पर्यावरण के प्रति उसकी जिम्मेदारी पर सवाल उठना लाजिमी है। हालांकि, पेड़ों की कटाई और सेलिब्रिटी के कार्यक्रम के बीच प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि तथ्यों और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही हो सकती है।
पर्यावरण संरक्षण केवल पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित करने या तस्वीरें खिंचवाने तक सीमित नहीं है। असली जिम्मेदारी पुराने और विशाल पेड़ों को बचाने की है। एक बड़ा पेड़ वर्षों तक वातावरण को स्वच्छ रखने, तापमान संतुलित करने और पक्षियों को आश्रय देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे पेड़ों को काटने से पहले यह देखना जरूरी है कि क्या छंटाई, तारों की सुरक्षित व्यवस्था या किसी अन्य विकल्प से समस्या का समाधान किया जा सकता था।
अब निगाहें संबंधित विभागों की भूमिका पर हैं। जरूरत इस बात की है कि पेड़ों की कटाई के कारणों, अनुमति और जिम्मेदारी की निष्पक्ष जांच हो तथा वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए। साथ ही, काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए उचित स्थान पर नए पौधे लगाने और उनके संरक्षण की ठोस व्यवस्था की जानी चाहिए।
सवाल सिर्फ पेड़ों के कटने का नहीं, बल्कि उस सोच का भी है जिसमें विकास, प्रचार और आयोजनों की चमक के सामने पर्यावरण पीछे छूट जाता है। आखिर सेलिब्रिटी के स्वागत और ब्रांड के प्रचार से जुड़ी तैयारियों के बीच इन विशाल पेड़ों को बचाने का प्रयास क्यों नहीं किया गया? विद्युत विभाग के SE के मुताबिक निगम की कोई भूमिका नहीं है और कटाई का वास्तविक कारण क्या था? इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।