दान से पापों का क्षय और पुण्यार्जन का मार्ग प्रशस्त : मुनि विवर्धनसागर
धन नहीं, धर्माराधना और पुण्य से सार्थक होता है जीवन : मुनि विवर्धनसागर
देवपूजा, गुरुपासना, स्वाध्याय और दान श्रावक की आराधना के प्रमुख अंग
कोटा। स्मार्ट हलचल|रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ के चातुर्मासिक प्रवास के दौरान धर्मसभा आयोजित हुई। धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के प्रवचनों का श्रवण कर धर्मलाभ लिया।मुनि विवर्धनसागर जी महाराज ने षट् आवश्यक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में आराधना और साधना दोनों का विशेष महत्व है। श्रावक और साधु के लिए मार्ग अलग हो सकते हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य आत्मकल्याण ही है। श्रावक के लिए देवपूजा, गुरुपासना, स्वाध्याय और दान आराधना के प्रमुख अंग हैं, जबकि संयम, तप और साधना मुनिराज के आध्यात्मिक जीवन के आधार हैं।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य धन प्राप्ति को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मान रहा है, जबकि धन के साथ धर्म और पुण्य का अर्जन भी आवश्यक है। केवल धन संचय से जीवन सार्थक नहीं होता। षट् आवश्यक का नियमित पालन, धर्माराधना और परोपकार के कार्य ही आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। दान के माध्यम से व्यक्ति में सेवा और परोपकार की भावना विकसित होती है तथा पुण्यार्जन का मार्ग खुलता है।
मुनिश्री ने कहा कि धर्म केवल सुनने या कहने की वस्तु नहीं है, बल्कि उसे जीवन के आचरण में उतारना आवश्यक है। प्रतिदिन षट् आवश्यक का पालन करने से व्यक्ति अपने भीतर अनुशासन, संयम और आत्मचिंतन की भावना विकसित कर सकता है।
उन्होंने मुनिराज के षट् आवश्यक की व्याख्या करते हुए कहा कि स्तुति, वंदना, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान, सामायिक और कायोत्सर्ग साधना के महत्वपूर्ण आधार हैं। श्रावक आराधना एवं सदाचरण के माध्यम से आध्यात्मिक विकास की ओर बढ़ता है, जबकि मुनिराज की साधना मोक्ष की दिशा में अग्रसर करती है।
मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि सुगंधिदेवी, महेंद्र बगड़ा तथा मौसम त्रिपाल वाले चौके की ओर से संत भवन में आहारचर्या के लिए निरंतर सहयोग प्राप्त हो रहा है।मंच संचालन पारस कासलीवाल ने किया। धर्मसभा में प्रकाश बज, महामंत्री पदम बड़ला, अशोक सांवला, पुष्प लुहाड़िया, टीकम पाटनी, जयकुमार हरसौरा, नरेश टेंट वाले, चंद्रेश रावका, नीरज अजमेरा, प्रियंक सिंघई, अशोक पापड़ीवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
